राजनाथ सिंह के साथ हुकुम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
साल 2002 की बात है। सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने बाबू हुकुम सिंह से शुक्रताल दर्शन और शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याण देव से भेंट का जिक्र किया। उस वक्त भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुक्रताल में चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य की श्रीमद्भागवत कथा रखी गई थी। कथा के समापन की पूर्ण आहुति में लखनऊ से सीएम राजनाथ सिंह को लेकर कैबिनेट मंत्री के रूप में हेलीकॉप्टर से हुकुम सिंह शुक्रताल पधारे। कर्मयोगी संत से आशीर्वाद के बाद उन्होंने यज्ञशाला में आहुतियां अर्पित की थी। सांसद एवं पूर्व मंत्री हुकुम सिंह के निधन पर पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शिक्षा के विकास में उनका योगदान मिला। वे परिपक्व और कुशल राजनैतिज्ञ थे।
चैंबर जी-59 में वकालत करते थे बाबूजी
कचहरी में चैंबर नंबर जी-59 की पहचान बाबू हुकुम सिंह से होती है। वर्ष 1969 में सेना से कैप्टन का पद त्याग कर यहीं उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस प्रारंभ की थी। कैराना और शामली से ग्रामीण उनसे मिलने आते थे। आज इस चैंबर में वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषचंद अरोरा बैठते है। अरोरा बताते है कि 22 जनवरी 1974 का दिन उन्हें नहीं भूलता। पहली बार विधायक बने हुकुम सिंह ने उनसे कहा कि सुभाष अब आप ही मेरे चैंबर को संभालेंगे। वर्ष 1970 में जब पंडित वाचस्पति कौशिक जिला बार संघ के अध्यक्ष बने तब उन्हें सचिव का दायित्व मिला था। अभी भी वह जिला बार संघ के सदस्य थे।
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