प्रदेश के किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की आर्थिक स्थिति को उबारने के लिए किए जा रहे प्रयास सफलता के पटल पर नहीं उतर पा रहे हैं। इस साल भी गन्ने का बकाया भुगतान नहीं होना और आलू किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में किसानों को एक बार फिर अपने मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की याद आ रही है। कारण, अब किसानों के दर्द को हक की आवाज में बदलने वाला बाबा टिकैत जैसा नेतृत्व उनके पास नहीं है।
6 अक्तूबर सन् 1935 में मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में जन्में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को आठ साल की उम्र में ही बालियान खाप का मुखिया बनाया गया था। वह 15 मई 2011 को कालजयी हो गए थे। 1986 में भारतीय किसान यूनियन की कमान टिकैत को सौंपी गई। 1987 में करमूखेड़ी बिजलीघर से पहले आंदोलन की शुरूआत हुई थी।
यहां धरना और प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में किसान जयपाल सिंह और अकबर की मौत से प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था। 1988 में मेरठ कमिश्नरी का ऐतिहासिक धरना 44 दिन तक चला था। किसानों को बाबा पर पूरा भरोसा था। भाकियू का रणसिंघा बजते ही किसान टिकैत के इर्द-गिर्द जमा हो जाते थे। यह टिकैत के ही बूते की बात थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह को सिसौली महापंचायत में धूप में खड़े होकर करवे से पानी पीने को मजबूर कर दिया था।
टिकैत के रुख से मिल चलाने वाले पूंजीपतियों की इतनी हिम्मत नहीं थी कि गन्ना लेने के बाद किसानों को भुगतान के लिए ठेंगा दिखा सके। आज भारतीय किसान यूनियन और उसके नेता भी है लेकिन बाबा के नहीं होने से किसानों की आवाज कमजोर पड़ी है। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कलंजरी का कहना है कि किसानों के इतने बड़े नेता बनने के बाद भी वे मरते दम तक साधारण किसान ही रहे।
जाति-धर्म से दूर थे बाबा
बाबा मरते दम तक जाति-धर्म से दूर रहे। वे जाति व मजहब के नाम पर किसानों की खेमेबंदी नहीं करते थे। उनकी पंचायत में हर-हर महादेव और अल्लाह हू अकबर का स्वर एक साथ गूंजता था।
बाबा टिकैत की प्रतिमा लगाने की मांग
भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने शहर में बाबा टिकैत की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनका संगठन यह मांग लंबे समय से उठा रहा है। सोमवार को चौधरी चरण सिंह पार्क में किसान गोष्ठी होगी।
सफरनामा
जन्म: 6 अक्तूबर 1935 को मुजफ्फरनगर के गांव सिसौली में
मुखिया: बालियान खाप
1987 : करमूखेड़ी बिजलीघर पर पहला आंदोलन
1988 : मेरठ कमिश्नरी का 44 दिन तक घेराव
1988 : रजबपुर में 18 दिन तक सत्याग्रह
1989 : खैर में पुलिस के खिलाफ आंदोलन
1993 : दिल्ली के वोट क्लब पर एतिहासिक धरना
2000 : लखनऊ और मुरादाबाद किसान आंदोलन में कई बार गिरफ्तार हुए
15 मई 2011 : हड्डियों में कैंसर के कारण मुजफ्फरनगर में निधन