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तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका, पंचायत पर लगाया ये आरोप, पति कर रहा दूसरा निकाह

Thu, 05 Sep 2019 12:38 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

  • तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका
  • मेरठ की आयशा ने पंचायत पर लगाया तलाक दिलाने का आरोप
  • सहारनपुर में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ पत्रकारों से की बातचीत
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फरहा फैज के साथ पीड़ित महिला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ की आयशा के तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। आयशा ने पंचायत पर दबाव बनाकर उससे शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है। इस मामले में आयशा ने पति, जेठ, पंचायत के तीन प्रमुख पंच, राष्ट्रीय महिला आयोग, भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है। 

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सहारनपुर में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ कोर्ट रोड स्थित प्रतिष्ठान पर पत्रकारों से बातचीत में मेरठ के करीम नगर निवासी आयशा ने बताया कि उसका निकाह करीम नगर निवासी सरफराज के साथ हुआ था। तीन माह पूर्व अचानक उसके पति को उसके ससुराल के लोग दूर रखने लगे। उसके तीन साल की एक बेटी है, जबकि जून 2019 में ही उसने एक बेटे को जन्म दिया था।

जिस दिन उसने बेटे को अस्पताल में जन्म दिया, उसे उसी दिन ससुराल के लोग अस्पताल से घर ले गए थे। उसके पति का कई दिन से पता नहीं था। चार दिन बाद ही 17 जून 2019 को अचानक करीम नगर में उसके जेठ ने पंचायत बुला ली। पंचायत में उसे बुलवाया गया और उससे शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। उसके बाद पंचायत ने फरमान सुना दिया कि अब उसका सरफाराज से कोई रिश्ता नहीं रह गया। सरफराज से उसका तलाक हो गया। पंचायत के आदेश पर उसकी बेटी और बेटे को उससे छीन लिया। 
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आयशा ने आरोप लगाया कि उसके पिता आफताब अंसारी ने सामाजिक प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए उसे घर में रखने से इंकार कर दिया। वह अकेली पड़ गई, कोई रास्ता न देख वह दिल्ली में किसी परिचित के यहां झोपड़ी में रहने लगी। आरोप लगाया कि पंचायत ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी। उस पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करा लिए और अपनी मर्जी से उसकी रूपरेखा तैयार करा ली।

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अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि इस मामले में आयशा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर करने के संबंध में अपील की गई थी। दो सितंबर को अपील को मंजूर कर लिया गया है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चलेगा। जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग, पंचायत में शामिल तीन पंच, पति सरफराज और जेठ सलीम को प्रतिवादी बनाया है। एक ही तारीख में तीन बार तलाक के शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराकर तलाक दे दिया गया है। सिर्फ शपथ पत्र कोर्ट का आदेश नहीं माना जा सकता।

पति अब कर रहा है दूसरा निकाह
आयशा ने आरोप लगाया कि उसका पति सरफराज उससे कहता रहा है कि वह उसके साथ ही रहना चाहता है, वह किसी प्रकार उसे ले जाएगा। यहां तक कि उसने ही वकील के पास जाने के लिए कहा था, लेकिन अभी पता चला है कि गुरुवार को ही उसका दूसरा निकाह होने जा रहा है। उसने प्रशासन ने निकाह रुकवाने की मांग की है।

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आयशा से अब कोई संबंध नहीं : सरफराज
करीम नगर निवासी सरफराज से फोन पर इस बारे में बात की, तो उसका कहना है कि उसका कई माह पूर्व वैचारिक मतभेद के चलते आयशा से तलाक हो चुका है। कोर्ट में इसका फैसला भी हो चुका है। अब आयशा से उसका कोई संबंध नहीं रह गया है।

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