मेरठ। आवास एवं विकास परिषद द्वारा सेंट्रल मार्केट में की जा रही नोटिस की कार्रवाई अब विवादों के घेरे में आ गई है। शास्त्रीनगर क्षेत्र में परिषद की टीम ने बिना स्थलीय निरीक्षण किए ही धड़ाधड़ नोटिस चस्पा करने शुरू कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों ने नियम-कायदों के अनुसार सेटबैक (खाली जगह) छोड़ी है या जिनके प्लॉट खाली पड़े हैं उन्हें भी अवैध निर्माण तोड़ने के नोटिस थमा दिए गए हैं। विभाग की इस एक ही इबारत वाली कार्रवाई से नियम का पालन करने वाले भवन स्वामी दहशत में हैं।
परिषद की लापरवाही का आलम यह है कि शास्त्रीनगर सेक्टर-3 (मकबरे के पास) में मकान संख्या 503 जिसने नियमानुसार पूरा सेटबैक छोड़ा हुआ है उसे भी नोटिस दिया गया है। वहीं, बगल के मकान नंबर 504 जो पूरी तरह खाली प्लॉट है और जिसमें महज पीछे की तरफ एक कमरा बना है उस पर भी नोटिस चस्पा कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि टीम बिना देखे ही हर घर पर एक जैसे नोटिस चिपका रही है।
आवास विकास की इस कार्रवाई में कई तकनीकी खामियां भी सामने आ रही हैं। नोटिस आज भी मूल आवंटियों के नाम जारी किए जा रहे हैं जबकि संपत्ति कई बार बिक चुकी है और वर्तमान में वहां कोई और रह रहा है। वहीं व्यापारियों ने परिषद पर भेदभाव का भी आरोप लगाया है। बताया कि एक ही क्षेत्रफल के दो पड़ोसियों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए गए हैं। एक को फ्रंट और बैक दोनों तरफ सेटबैक छोड़ने को कहा गया है जबकि दूसरे को सिर्फ फ्रंट सेट-बैक का नोटिस मिला है। सबसे ज्यादा परेशानी उन 44 संपत्तियों के मालिकों को हो रही है जिन्हें पहले ही सील किया जा चुका है। इन्हें कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
दोपहर की नींद में चुपचाप चस्पा किए नोटिस
शास्त्रीनगर स्कीम नंबर-7 के निवासियों ने टीम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब दोपहर में लोग सो रहे थे तब टीम ने चुपचाप आकर नोटिस चिपका दिए। डॉ. दीपक वशिष्ठ के आवास समेत कई अन्य घरों पर बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई की गई। विरोध करने पर टीम ने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अवैध निर्माण तोड़ने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
बुजुर्गों की पीड़ा : बीमारी से लड़ें या आशियाना बचाएं?
कार्रवाई की जद में आए कई वयोवृद्ध लोग (70 वर्ष से अधिक आयु) भावुक नजर आए। उनका कहना है कि जीवन भर की कमाई लगाकर नियम के अनुसार मकान बनाया, अब इस उम्र में वे बीमारी से जूझते हुए गुजर-बसर करें या मेहनत से बनाए गए मकान को खुद अपने हाथों से तोड़ें।
अधिकारी का पक्ष:
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है और मानकों के अनुसार सेटबैक छोड़ना ही होगा। यदि किसी को लगता है कि नोटिस गलत दिया गया है तो वे परिषद के कार्यालय में अपनी आपत्ति और जवाब दाखिल कर सकते हैं। नियमों के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अनिल कुमार सिंह, उप आवास आयुक्त