आज होगी व्यापारियों के साथ बैठक, संपत्ति मालिकों को जमा करने होंगे दस्तावेज
भवन में अनधिकृत निर्माण तोड़ने के लिए जारी होंगे नोटिस, मिलेगा 15 दिन का समय
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के लोग सहमे हुए हैं। बाजार में लगातार लोग सेट बैक छोड़ने के लिए अपने ही आशियाने पर खुद ही हथौड़े चलवा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को दिए आदेश में आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने को कहा था। ऐसे में न केवल शास्त्रीनगर बल्कि माधवपुरम, जागृति विहार, टीपीनगर समेत परिषद की विभिन्न कॉलोनियों के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। वहीं आवास विकास परिषद प्रभावित दुकानदारों के लिए दुकानें बनवाएगा, इसके लिए बृहस्पतिवार को टेंडर जारी कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के लिए बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने मेरठ पहुंचकर प्रभावित लोगों व दुकानदारों से वार्ता की थी। इसमें प्रभावित हो रहे लोगों को जागृति विहार विस्तार योजना में रियायती दरों पर फ्लैट देने, बिल्डर द्वारा उनके मकानों के स्थान पर पुनर्निर्माण करने, पल्लवपुरम व गंगानगर में वेंडिंग जोन में दुकानें देने आदि बिंदुओं पर चर्चा हुई थी।
वहीं प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए परिषद लगातार कसरत कर रहा है। शास्त्रीनगर में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 368 तथा एलआइजी श्रेणी के 138 मकान हैं। इन लोगों का कहना है कि आवास महज चार इंच की दीवार पर बने हैं, जिनमें सेट बैक छोड़ना भी संभव नहीं है।
ऐसे में आवास विकास परिषद ने सेक्टर-7 में रंगोली मंडप के पास पुराने सामुदायिक भवन के स्थान पर 116 दुकानों का कॉम्प्लेक्स तथा हापुड़ रोड पर रॉयल प्लाजा के पास 80 दुकानों का कॉम्प्लेक्स निर्माण कराने की योजना तैयार की है। इसके लिए बृहस्पतिवार को टेंडर जारी कर कंपनियों से बोली मांगी गईं। टेंडर खुलने के बाद जल्द ही इन दोनों स्थानों पर निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम भी नई सड़क पर अपने नए कार्यालय परिसर में 48 दुकानें बना चुका है, सूरजकुंड पर 40 दुकानें तथा महापौर कैंप कार्यालय परिसर में 180 दुकानों का कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी की जा रही है। इन दुकानों को भी आवंटित करने में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उप आयुक्त आवास अनिल सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन सील 44 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है जिनमें स्कूल, नर्सिंग होम, विवाह मंडप तथा बैंकों का संचालन हो रहा था। इनका सर्वे पूरा हो गया है। अब इन भवन के अवैध व्यावसायिक निर्माण को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। लोगों को इन भवनों को स्वीकृत मानचित्र के मुताबिक मूल आवासीय रूप में लाना होगा।
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