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विद्यार्थियों का मूल्यांकन करना कड़ी चुनौती

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मेरठ। कोविड-19 से पहले हमारे विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में क्लास रूम प्रोग्राम के तहत अध्ययन एवं अध्यापन पूरा होने के बाद परीक्षाएं आयोजित कराई जाती थीं। जिसके द्वारा यह ज्ञात हो जाता था कि विद्यार्थी को विषय समझ में आया या नहीं अथवा उसने कितना ग्रहण किया है। वहीं, वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से शिक्षणेत्तर कार्य बंद हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का मूल्यांकन किस प्रकार करें एवं उनकी परीक्षा कैसे आयोजित कराई जाएं यह कड़ी चुनौती है। ये विचार शुक्रवार को सीसीएसयू के राजनीति विज्ञान विभाग एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में चल रही ई-कार्यशाला उच्च शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में मुख्य वक्ता नई दिल्ली इग्नू के शिक्षा संकाय विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. गौरव सिंह ने रखे।
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सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में मूल्यांकन यंत्र की भूमिका एवं अनुप्रयोगों विषय पर उन्होंने कहा कि शिक्षक ऑनलाइन टीचिंग एंड लर्निंग में विद्यार्थियों को विषय से संबंधित व्याख्यान, अध्ययन एवं अध्यापन की विषय वस्तु उपलब्ध करा देते हैं। इसमें यह पता कैसे कर पाएंगे कि विद्यार्थी ने कितना ज्ञान उस व्याख्यान, अध्ययन अथवा अध्यापन से ग्रहण किया है। उसे विषय कितना समझ में आया। इसके लिए हमें मूल्यांकन सॉफ्टवेयर के बारे में जानना होगा। वहीं, उनकी कार्य विधि के बारे में समझना होगा कि उनका प्रयोग हम विद्यार्थियों के मूल्यांकन में किस तरह कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में ई-मूल्यांकन नहीं किया जाता था। यूजीसी, एनटीए, आयोगों, विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं द्वारा पहले भी ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित की जाती रही हैं। हालांकि उनका रूप वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का रहा है।
इनका रहा सहयोग
प्रोप़वन कुमार शर्मा ने अतिथियों का धन्यवाद किया। कार्यशाला में डॉ. राजेंद्र कुमार पांडेय, प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा, डॉ. भूपेंद्र प्रताप, डॉ. सुषमा, डॉ. देवेंद्र उज्ज्वल, डॉ. जयवीर राणा, डॉ. अशोक पवार, संतोष त्यागी, नितिन त्यागी एवं भानु प्रताप आदि सहयोग रहा।
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