मवाना के भैंसा गांव निवासी अंतर्राष्ट्रीय शूटर रवि कुमार देशवासियों के विश्वास पर खरे उतरे। आज होने वाले मुकाबले में वह सोना जीतने के लिए जी जान से जुटे हैं। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा,'एशियन गेम्स में देश के लिए पहला पदक जीतना बहुत ही शानदार रहा। मैं और अपूर्वी चंदेला दोनों बहुत खुश हैं कि जब भी एशियन गेम्स 2018 में देश के लिए पहले मेडल की बात होगी तो हमारी जोड़ी का नाम लिया जाएगा।'
जीत के बाद सबसे पहले कोच को किया मैसेज
रवि के अनुसार पदक जीतने के बाद सबसे पहले मैंनें अपने कोच अभिनव बिंद्रा को मैसेज किया। उन्होंने बधाई दी तो और भी ज्यादा खुशी हुई। उसके बाद मैंने अपने पिता और चाचा से वीडियो कांफ्रेंसिंग की। उन्होंने मुझे शाबासी दी। लेकिन मैं जकार्ता में बैठा मां से बात नहीं कर पाया।
गौरतलब है कि रवि ने एयरफोर्स की राइफल से निशाना लगा रहे हैं। और इसी राइफल से उन्होंने पदक जीता है। रवि इंडियन एयरफोर्स में तैनात हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग गाजियाबाद में है।
अंतर्राष्ट्रीय शूटर होने के बावजूद उन्हें सरकारी व्यवस्था की लापरवाही का शिकार होना पड़ा था। रवि के मुताबिक वह तीन बार मेरठ में लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुके हैं। जिसमें पहले दो बार आवेदन की गई फाइल डीएम ऑफिस से ही गायब हो गई थी। इसमें असलाह बाबू कोई जवाब नहीं दे पाए थे। अप्रैल माह में गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य जीतकर आए रवि ने तीसरी बार लाइसेंस के लिए आवेदन की फाइल एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव को सौंपी थी। उनके पास से फाइल डीएम कार्यालय पहुंच गई। लेकिन चार माह बाद भी उन्हें लाइसेंस नहीं मिला।
मुकाबले को लेकर उत्साहित थे ग्रामीण
रवि ने चाचा डॉ. विजय कुमार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बता की। रवि ने बताया कि युगल मुकाबले में मैच अंतिम दौर तक शानदार चलता रहा। साथी अपूर्वी चंदेला अंतिम मौके पर थोड़ी नर्वस हुईं। जिससे कुछ पाइंट से स्कोर कम हो गया। चाचा डॉ. विजय कुमार ने बताया कि रवि के मुकाबले को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह था। वह किसी काम के चलते मुकाबला नहीं देख पाए, परिजन पल-पल की जानकारी उन्हें फोन पर देते रहे।
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