एशियाड में देश के लिए रजत जीतने वाले इस खिलाड़ी के शूटर बनने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। वह बनना तो चाहते थे क्रिकेटर लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक साल तक क्रिकेट की प्रैक्टिस भी की लेकिन बात नहीं जमी। इसके बाद शूटिंग में हाथ आजमाने की ठानी लेकिन कोच ने कहा अभी बच्चे हो पढ़ाई पर ध्यान दो, मगर कहते हैं न हौंसला हो तो मुश्किलें क्या हैं। उम्र कितनी भी हो इरादे पक्के हों तो मंजिल कदम चूम ही लेती है। ऐसी ही दिलचस्प कहानी शार्दूल विहान की भी है।