फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोच ने बच्चा समझ शार्दूल को शूटिंग सिखाने से कर दिया था इंकार, फिर ऐसे जीता सिल्वर  

Fri, 24 Aug 2018 03:53 PM IST
विजय जैन यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 6
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
एशियाड में देश के लिए रजत जीतने वाले इस खिलाड़ी के शूटर बनने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। वह बनना तो चाहते थे क्रिकेटर लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक साल तक क्रिकेट की प्रैक्टिस भी की लेकिन बात नहीं जमी। इसके बाद शूटिंग में हाथ आजमाने की ठानी लेकिन कोच ने कहा अभी बच्चे हो पढ़ाई पर ध्यान दो, मगर कहते हैं न हौंसला हो तो मुश्किलें क्या हैं। उम्र कितनी भी हो इरादे पक्के हों तो मंजिल कदम चूम ही लेती है। ऐसी ही दिलचस्प कहानी शार्दूल विहान की भी है।
विज्ञापन

क्रिकेट के बाद बैडमिंटन की प्रैक्टिस

2 of 6
शार्दुल विहान
शूटिंग से पहले क्रिकेट और बैडमिंटन खेल को अपनाने वाले शार्दूल विहान की मंजिल तो शूटिंग थी। मात्र 6 साल की उम्र में क्रिकेटर बनने का सपना लिए शार्दुल ने एक साल तक विक्टोरिया पार्क में क्रिकेट की प्रैक्टिस की थी। लेकिन मौका नहीं मिलने पर शार्दुल ने पिता दीपक विहान से इसकी शिकायत की। दीपक ने उसे बैडमिंटन की प्रैक्टिस करानी शुरू कर दी। कोच ने कहा कि शार्दुल बैडमिंटन के लिए फिट नहीं है, इसे किसी दूसरे गेम में प्रैक्टिस कराओ।
विज्ञापन

शार्दूल ने राइफल उठाई और तान दी

3 of 6
शार्दुल विहान
दीपक शार्दुल को लेकर मेरठ राइफल एसोसिएशन के कोच वेदपाल सिंह से मिले। उन्होंने शार्दुल की कम उम्र देखते हुए कहा कि अभी थोड़ा इंतजार करो। शार्दुल शरीर से थोड़ा हेल्दी था और वह कम उम्र में भी बढ़ी उम्र का दिखता था। पिता के कहने पर कोच वेदपाल ने शार्दुल को राइफल उठाकर निशाना लगाने के लिए कहा। शार्दुल ने बड़े आराम से राइफल उठाई और टारगेट की ओर तान दी। फिर तो शार्दुल ने मुड़कर नहीं देखा।

ऐसे की शुरुआत  

4 of 6
शार्दूल विहान के साथ दादा और अन्य परिजन - फोटो : अमर उजाला
पिता दीपक विहान के मुताबिक यह बात वर्ष 2012 की है। उसी साल शार्दुल ने नार्थ जोन प्रतियोगिता में अपना पहला गेम खेला। जिसमें उसने सिल्वर मेडल जीत कर सबका दिल जीत लिया। उसके बाद उसे नेशनल की तैयारी शुरू करायी गई। लेकिन नेशनल में कम से कम 12 साल का खिलाड़ी ही खेल सकता था। 12 साल का होते ही उसका चयन नेशनल जूनियर गेम के लिए सलेक्शन हो गया। उसके बाद से शार्दुल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 
विज्ञापन

पहले ही प्रयास में जीता था सिल्वर मेडल 

5 of 6
शार्दूल विहान के पिता व दादा - फोटो : अमर उजाला
साल 2012 में शार्दूल विहान की उम्र 9 साल थी तो उसने स्टेट क्वालिफाई कर नार्थ जोन प्रतियोगिता में अपना पहला गेम खेला। इसमें उसने सिल्वर मेडल जीतकर सभी को हतप्रभ कर दिया। इसके बाद उसे नेशनल की तैयारी शुरू कराई गई लेकिन कम 12 साल से कम उम्र होने के चलते नेशनल राइफल एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआई) ने तब तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया। अच्छा प्रदर्शन के बाद भी शार्दूल विहान नेशनल में नहीं खेल सका। शार्दूल को इस फैसले से निराशा तो हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 12 साल का होते ही उसका नेशनल जूनियर गेम के लिए सेलेक्शन हो गया। उसके बाद से शार्दूल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक प्रतियोगिताओं में वह अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर मेडल हासिल करता चला गया। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

खुश है पहले कोच वेदपाल सिंह 

6 of 6
शार्दुल विहान
कोच वेदपाल सिंह शार्दूल विहान के एशियाड में प्रदर्शन से बेहद खुश है। वेदपाल सिंह ने बताया कि शार्दूल एक अंक से गोल्ड मेडल से चूका है। लेकिन वह बड़ा हिम्मती खिलाड़ी है। इतनी कम उम्र में इतनी परिपक्वता किसी में नजर नहीं आती। उन्हें उम्मीद है कि शार्दूल विश्व शूटिंग और ओलंपिक में भी भारत के लिए पदक हासिल करेगा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें