वहीं इस दौरान मोहतमिम ने मेजर जनरल को बताया कि दारुल उलूम में जो शिक्षा दी जा रही उस शिक्षा को हासिल करने के बाद देश की बहुत सी यूनिवर्सिटी में सीधे प्रवेश मिल जाता है। जिस पर मेजर जनरल ने छात्रों को सेना में भर्ती का ऑफर देते हुए उन्हें शीघ्र ही अपना बायोडाटा भेजने को कहा।
एससी शरण ने विश्व में दारुल उलूम के योगदान की सराहना करते हुए पूछा कि संस्था की 150 वर्ष के इतिहास में धर्म में क्या परिवर्तन हुआ है। उनके सवाल पर मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मजहब में परिवर्तन नहीं होता, बल्कि समाज में बहुत परिवर्तन आया है। इसके उपरांत मेजर जनरल ने एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया, नई एवं पुरानी लाइब्रेरी समेत संस्था के विभिन्न विभागों का भ्रमण किया। मेजर जनरल ने मोहतमिम को सेना का प्रतीक चिह्न भी भेंट किया।
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