ये है पीएम 2.5 से नुकसान
सहायक क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी डॉ. योगेंद्र कुमार ने बताया कि पीएम को पर्टीकुलेट मैटर कहा जाता है। ये वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण हैं। इन्हें इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 और पीएम 10 की मात्रा 100 को ही सुरक्षित माना जाता है। मौसम में नमी ज्यादा होने पर कण एक स्टेज पर ही घूमते रहते हैं। ऐसे में प्रदूषण का असर बढ़ जाता है।
क्या है पीएम 10
इसे रेस्पायरबल पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। इन कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर होता है। इसमें धूल और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रक्शन, पुआल आदि जलाने से बढ़ता है। इसके कारण उक्त रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। मेरठ में पीएम 10 का लेवल बढ़ता जा रहा है। मानक 100 है, लेकिन यह 300 को पार कर रहा है।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/