फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#KabTakNirbhaya: हैदराबाद की घटना से हर तरफ गुस्सा, सुरक्षा को लेकर खड़े हो रहे सवाल

Tue, 03 Dec 2019 09:23 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
हैदराबाद की घटना पर चर्चा करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

हैदराबाद कांड को लेकर हर तरफ गम और गुस्सा है। इस कांड के बाद महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिलाओं ने डॉक्टर बिटिया को इंसाफ दिलाने के लिए दुष्कर्मियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग की है। अमर उजाला ने अपराजिता अभियान के तहत महिलाओं की समूह चर्चा में न्याय में देरी का मामला जोर-शोर से उठाया गया। महिलाओं ने कहा कि अब उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं तत्पर रहना होगा। किसी भी अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी होगी। 

विज्ञापन


मुजफ्फरनगर में एसडी कॉलेज ऑफ कॉमर्स में आयोजित समूह चर्चा की शुरुआत विधि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकुल गुप्ता ने कानूनी जानकारी से की। उन्होंने कहा कि महिला अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए। डायरेक्टर डॉ. मंजू मल्होत्रा, डॉ. छवि जैन, गरिमा तोमर, काजोल, मानसी, सोनिका गर्ग, प्रीति दीक्षित, प्राची, शिवानी, रुखसार आदि ने दुष्कर्म के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। साथ ही महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की वकालत की। 

हैदराबाद की घटना एक विक्षिप्त मानसिकता
हैदराबाद की घटना एक विक्षिप्त मानसिकता है। यह केवल किसी एक प्रयास से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से दूर होगी। सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करे और उनमें न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करें। - डा. मुकुल गुप्ता, सहायक प्राध्यापक (विधि)
विज्ञापन


कानून का सख्ती से पालन हो
निर्भया कांड के बाद जो कानून बने वे काफी सख्त हैं, लेकिन उनका पालन सख्ती से नहीं हो रहा। कानून को सख्ती से पालन कराने की जरूरत है। - डा. मंजू मल्होत्रा, डायरेक्टर।

महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए
महिलाओं को सम्मान देने की बात तो सब करते हैं, लेकिन व्यवहार में कोई नहीं लाता। परिवार से ही इसकी शुरुआत होनी चाहिए। - प्राची, शिक्षिका। 

विद्यालयों में संस्कारित शिक्षा की जरूरत
जरूरत संस्कार युक्त शिक्षा की है। स्कूल-कॉलेजों में छात्रों को मोरल एजुकेशन दी जाए। घरों में भी माता-पिता लड़कों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं। - चंदना दीक्षित, शिक्षिका। 

दुष्कर्म जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानून की आवश्यकता है। दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी तो अन्य लोग भी इससे सबक लेंगे। - मानसी अरोरा, शिक्षिका। 

परिवार के लोग केवल लड़कियों के लिए बंदिशें लगाते हैं, लेकिन बेटों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बेटों को अच्छे संस्कार मिलेंगे तो इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी। - सोनम चौहान, शिक्षिका। 

दुष्कर्म जैसी घटना के आरोपियों को अधिवक्ता की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। समाज को उनका बहिष्कार करना चाहिए, तभी इस तरह की घटनाएं रुकेंगी। - एकता मित्तल, शिक्षिका।
विज्ञापन

कानून में बदलाव का उसे और सख्त बनाने की जरूरत है। साथ ही कानून का कड़ाई से पालन भी होना चाहिए। केवल कानून बनाने मात्र से कुछ नहीं होगा। - आकांक्षा पाल, शिक्षिका। 

हैदराबाद की घटना के दोषियों को जेल में मटन-चिकन खिलाया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। दोषियों को सार्वजनिक रूप से सजा दी जानी चाहिए। - पूर्वी, शिक्षिका। 

समाज से मोरल वेल्यू खत्म होती जा रही है। बच्चों को अच्छे संस्कार दें साथ ही सरकार महिला अपराधों को लेकर सख्त कानून बनाए। - रेनू, शिक्षिका। 

कई मामलों में न्यायालय ने त्वरित निर्णय दिए हैं। महिला अपराधों को किसी वर्ग से नहीं जोड़ा जा सकता। समाज को स्वयं भी आगे आकर जिम्मेदारी निभानी होगी। - वैभव कश्यप। 

दुष्कर्म जैसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। न्याय में देरी भी अन्याय से कम नहीं होती। इसलिए पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए। - अमित त्यागी।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें