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पश्चिम की नब्ज को टटोलेंगे अमित शाह, डालें- भाजपा की रणनीति पर एक नजर

Sat, 11 Aug 2018 01:30 PM IST
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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अमित शाह
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पश्चिम में पिछले एक साल के भीतर माहौल बदल चुका है। ऐसे में भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन खासतौर पर पश्चिम की नब्ज को पकड़ेंगे।

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अमित शाह लोकसभा 2014 के चुनाव में उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे। उस समय उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित पश्चिम के माहौल को बहुत गहराई से पकड़ा था। इस दौरान उन्होंने 65 सीटों के लक्ष्य पर काम करते हुए खुद लगातार जिला स्तर पर बैठकें की थी। अमित शाह ने बैठक में बूथ प्रभारियों तक को सीधे संबोधित करते हुए बूथ जीतने का मंत्र दिया था। इसी का परिणाम रहा कि भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में 73 सीटें जीती थी। इसी बूथ मैनेजमेंट के साथ भाजपा ने 2017 का यूपी विधानसभा चुनाव भी फतह किया। 

लेकिन अब उपचुनावों में भाजपा की हार और महागठबंधन ने एक नई चुनौती पेश कर दी है। इस बदले माहौल और गठबंधन की चुनौती से पार पाते हुए लोकसभा चुनाव में यूपी फतह के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रविवार को मेरठ पहुंचेंगे। सबसे पहले वह कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करेंगे। इसके बाद यूपी के सांसदों और विधायकों के साथ अलग से बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह पश्चिमी क्षेत्र को पूरी तरह अपने फोकस में रखेंगे। क्योंकि पिछले लोकसभा और इस बार के विधानसभा चुनाव से जो हवा पश्चिम से चली थी, उसने पूरब तक भाजपा की फसल को लहलाया था। ऐसे में भाजपा का पूरा फोकस पश्चिम पर ही है।

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जातिगत समीकरण साधने पर रहेगा जोर
भाजपा सूत्रों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरण सबसे ज्यादा अहम रहते हैं। जाट वोट पश्चिम में अहम फैक्टर है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को जाट वोट एकतरफा मिला था। इस बार जाट वोट भाजपा से कहीं न कहीं हटा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही दलितों को साधने की जो रणनीति भाजपा ने बनाई थी, वह पूरी तरह गड़बड़ा गई है। हालांकि एससी एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक पास कर भाजपा ने इसकी भरपाई की कोशिश की है। लेकिन इसका सहीं संदेश भाजपाई दलित समाज तक पहुंचा भी पाएंगे, इसमें संदेह हैं। क्योंकि 2 अप्रैल को हुए दलित आंदोलन का डैमेज कंट्रोल भाजपाई आज तक नहीं कर पाए हैं।

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