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कोरोना पर खास रिपोर्ट, पढ़िए मार्च से अब तक का पूरा अपडेट, ये कहते हैं विशेषज्ञ

Fri, 19 Feb 2021 05:36 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में कोरोना - फोटो : अमर उजाला
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करीब साल भर पहले कोरोना वायरस ने देशवासियों की नींद उड़ा दी थी। समय बीतने के साथ ही वायरस के कम होते प्रभाव को विशेषज्ञ भी पूरी तरह नहीं समझ पा रहे हैं। एक तरफ लोगों का अनुमान था कि सर्दी के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ेगी और गर्मी आते ही मरीज कम हो जाएंगे, लेकिन वायरस का असर इससे इतर ही मिला।

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मार्च 2020 से शुरू हुए कोरोना काल के दौरान मेरठ-सहारनपुर मंडल के 10 जिलों में अब तक एक लाख 12 हजार 591 मरीज मिले चुके हैं। इनमें से 1138 की मौत हो गई। सबसे ज्यादा 407 मौत मेरठ जिले में हुई, जबकि सबसे ज्यादा 26516 मरीज गाजियाबाद जिले में मिले। मेरठ मंडल में 85,939 मरीज मिले और 797 लोगों की मौत हुई। वहीं सहारनपुर मंडल में 26,652 मरीज मिले और 341 लोगों की मौत हुई। कोरोना वायरस के मामलों में पिछले महीने से कुछ ज्यादा गिरावट देखी गई है। मेरठ में कोरोना का पहला केस 27 मार्च 2020 को मिला था। इसके बाद से लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई थी।

संक्रमित करने की क्षमता कम 
कोरोना नया वायरस है इसके स्वभाव के बारे में स्टडी चल रही है। कोविड-19 से संक्रमित करीब 70 फीसदी लोग अब संक्रमण को दूसरे लोगों तक नहीं पहुंचा रहे हैं। - डॉ. सुधीर राठी, प्रभारी, कोविड अस्पताल मेडिकल
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मेरठ- सहारनपुर मंडल में एक लाख से ज्यादा को हुआ कोरोना, 1138 की हुई मौत
जिला                        मरीज         मौत
गाजियाबाद               26516       102
गौतमबुद्ध नगर          25308        91
मेरठ                        21315       407
बुलंदशहर                  6181        93
हापुड़                        4316        68
बागपत                       2293       36
सहारनपुर                   9952      135
मुजफ्फरनगर               8727     111
बिजनौर                       4346     64
शामली                         3627    31

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी
कोरोना को करीब एक साल हो गया है। ऐसे में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई है। जब वायरस संक्रमण को फैला पाने की क्षमता नहीं रखते हैं, तो पॉजिटिव केस की नई संख्या घटती है। - डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य, नोडल अधिकारी, कोविड अस्पताल मेडिकल

पहले जितनी हो रही जांच
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ना कहें या वायरस का कमजोर होना। ऐसे बहुत कम लोग बचे हैं जो दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। गिरते मामलों के पीछे यहीं संभावित कारण हो सकते हैं। जांच पहले जितनी ही हो रही हैं। - डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ
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