भूमिगत पानी का बेतरतीब दोहन रोकने और शहरवासियों को गंगाजल पिलाने के लिए जेएनएनयूआरएम के तहत वर्ष 2016-17 अमल में लाई गई मेरठ पेयजल योजना पर 400 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद शहरवासियों के कंठ सूखे पड़े हैं। अपर गंग नहर स्थित भोला की झाल पर बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बताने को तो 100 एमएलडी का है, लेकिन 35 एमएलडी गंगाजल की ही आपूर्ति हो रही है।
केंद्र सरकार से धन मिलने के बावजूद आज तक योजना का काम पूरा नहीं हो सका है। योजना में बनाए गए नौ भूमिगत जलाशयों में से पांच जलाशय आज तक पाइप लाइन से नहीं जोड़े जा सके हैं। शहर के अधिकतर हिस्सों तक पानी पहुंचाने के लिए सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, टाउन हाल, विकासपुरी, नौचंदी ग्राउंड, शास्त्रीनगर, गोला कुआं, माधवपुरम और बच्चा पार्क में नौ भूमिगत जलाशय (जोनल पंपिंग स्टेशन) बनाए थे। इनमें से सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, टाउन हाल और विकासपुरी के जलाशय तो गंगाजल से भर रहे हैं, लेकिन शास्त्रीनगर, नौचंदी ग्राउंड, बच्चा पार्क, माधवपुरम और गोला कुआं पंपिंग स्टेशनों को आज तक नहीं जोड़ा जा सका है। जिस कारण एक बहुत बड़ी आबादी तक गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। योजना पर करोड़ों रुपये खर्चने के बावजूद शहर में 157 नलकूप, 57 ओवर हेड टंकी और 3000 सबमर्सिबलों के जरिये भूमिगत पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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महानगर में ये हैं निगम के जल संसाधन
पानी की मांग 300 एमएलडी
गंगाजल की आपूर्ति 35 एमएलडी
नलकूप 157
10 एचपी सबमर्सिबल 500
वन एचपी सबमर्सिबल 3000
हैंडपंप 10 हजार
निजी सबमर्सिबल 10 हजार
डीपीआर भेजी है
2027 को ध्यान में रखकर 100 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। मांग के अनुसार ही प्लांट से गंगाजल की आपूर्ति बढ़ाई जानी है। लाइन से कनेक्ट होने से बचे पांच जोनल पंपिंग स्टेशनों को फिलहाल नलकूप से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इन्हें जोड़ने के लिए बनाई गई डीपीआर शासन को भेजी गई है।
- रमेश चंद्रा, परियोजना प्रबंधक, उत्तर प्रदेश जल निगम
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