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गंगा यात्रा: मिशन 2022 का पहला पड़ाव, पढ़िए- अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट

Tue, 28 Jan 2020 03:33 AM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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गंगा यात्रा एक तरफ जहां नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, तो इस यात्रा के जरिये अप्रत्यक्ष रूप से मिशन 2022 को साधने की तैयारी भी भाजपा ने शुरू कर दी है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही संबोधन में सिर्फ गंगा को केंद्र में रखा हो। लेकिन उनकी टीम विपक्षी दलों पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसे में इस यात्रा को आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी के पहले पड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

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गंगा यात्रा सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के 87 विधानसभा व 26 लोकसभा क्षेत्रों, 27 जनपदों के 1656 ग्रामों और 21 कस्बों व शहरों से गुजरेगी। लेकिन इस यात्रा और यात्रा के दौरान होने वाली जनसभाओं के माध्यम से सीधा संदेश इनसे दोगुने विधानसभा, लोकसभा क्षेत्रों, जनपद और गांव व कस्बों तक जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर बैराज से यात्रा का शुभारंभ किया। उनका लगभग 12 मिनट का भाषण पूरी तरह गंगा पर ही केंद्रित रहा। लेकिन भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह विपक्षी दलों पर निशाना साधने से नहीं चूके। सीएम योगी के आने से पहले जो भी वक्ता बोले, उन्होंने भी भाजपा सरकार की उपलब्धियों के बीच विपक्षी दलों पर निशाना साधा। यही रामराज की सभा में भी हुआ। 

योगी आदित्यनाथ हस्तिनापुर नहीं पहुंचे। यहां यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने जनसभा को संबोधित किया। दोनों ने ही विपक्षी दलों को सीधे निशाने पर रखा और अपनी सरकारी की उपलब्धियां बताई। यात्रा के दौरान सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए सभी सरकारी विभाग भी अपने स्टॉल हर गांव और कस्बे में लगा रहे हैं।
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गंगा यात्रा में सबसे अहम बात ये है कि इसमें ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा शामिल हो रहा है। पिछले चुनावों में भले ही भाजपा को मजबूत जीत हासिल हुई। लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अभी भी भाजपा की शहर के मुकाबले गांवों में पकड़ कमजोर है। हालांकि राष्ट्रोदय के बाद जिस तरह संघ की शाखाएं प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर फैलनी शुरू हुई हैं, उससे भाजपा को गांवों में भी संजीवनी मिली है। लेकिन सरकारी योजनाओं की जानकारी से अभी भी सुदूर क्षेत्र के गांव पीछे हैं। ऐसे में यह गंगा यात्रा गंगा किनारे के तमाम गांवों में कहीं न कहीं भगवा छाप जरूर छोड़ेगी। 

यात्रा के दौरान संवर रहे कस्बे और गांव
गंगा यात्रा के जरिये भले ही गंगा को स्वच्छ बनाने का आह्वान किया जा रहा हो। लेकिन उससे पहले जहां-जहां से यह यात्रा गुजर रही है, वहां के दिन बहुर रहे हैं। गांवों की सड़कें दुरुस्त हो रही हैं। स्कूल, सरकारी भवन रंगाई पुताई के साथ सुंदर नजर आने लगे हैं।

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