2014 में बसपा से शाहिद अखलाक ने 3,00,655 मत पाए। इनके सामने सपा के शाहिद मंजूर ने 2,11,759 मत प्राप्त किए। उधर, कांग्रेस से नगमा को भी 42,911 मतदाताओं ने वोट दिया। 2019 में बसपा-सपा गठबंधन में बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी ने 5,81,455 मत हासिल किए। बहुत ही कम अंतर से चुनाव हारे।
बसपा से देवव्रत तो सपा के टिकट पर अभी संशय
लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा ने मेरठ से त्यागी-दलित समीकरण के मद्देनजर देवव्रत त्यागी को प्रत्याशी बनाया है, वहीं इंडिया गठबंधन से अभी नाम तय नहीं है। भाजपा से अरुण गोविल प्रत्याशी हैं। गौरतलब है कि 25 साल से मुस्लिम सपा और बसपा के साथ अधिक दिखाई दिया है। पूर्व में बड़े स्तर पर कांग्रेस के साथ भी मुस्लिम खड़ा रहा है।
बिजनौर
बिजनौर लोकसभा सीट पर 45 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। लोकसभा चुनावों में 1957 में अब्दुल लतीफ एक अदद सांसद बन सके। मुसलमान यहां किंगमेकर की भूमिका में ही नजर आए। इस बार किसी भी बड़े दल ने मुसलमान को टिकट नहीं दिया है। रालाेद-भाजपा गठबंधन से चंदन चौहान, सपा से दीपक सैनी और बसपा से विजेंद्र सिंह चुनाव मैदान में हैं। सभी दलों की इस वोट बैंक पर निगाहें लगी हैं।
बागपत
बागपत सीट पर 28 प्रतिशत मुसलमान मतदाता हैं। 1991 से 2019 तक बागपत लोकसभा सीट पर प्रमुख दल बसपा और सपा ने मुस्लिमों को केवल तीन बार चुनाव लड़ने का मौका दिया है। 1998 में मेराजुद्दीन को सपा ने चुनाव लड़ाया, इन्हें 1,34,696 मत मिले। 1999 में में मेराजुद्दीन एक बार फिर सपा के चुनाव चिंह पर चुनाव लड़े, इस बार वोट प्रतिशत घट गया और केवल 59,807 मत ही मिल सके। 2004 में बसपा ने औलाद अली को लोकसभा लड़ाई। इन्होंने 1,32,543 मत पाए। इसके बाद किसी भी दल ने मुस्लिम समाज को लोकसभा का टिकट देने की पहल नहीं की। 2024 में भी मुस्लिमों को किसी बड़े दल ने गले नहीं लगाया।
मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम बताए जाते हैं। चुनाव के 72 साल के इतिहास में दूसरी बार ऐसा होगा, जब एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है। 1967 में यहां से लताफत अली सांसद चुने गए थे। इसके बाद यहां से मुफ्ती मोहम्मद सईद, सईदुज्जमां, मुनव्वर हसन और कादिर राना संसद पहुंचे। इससे इतर विधानसभा चुनावों में मुसलमान अपना दमखम दिखाते रहे हैं। 2019 और 2024 मेें किसी भी प्रमुख दल ने मुस्लिम को प्रत्याशी नहीं बनाया है।
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राजनीतिक दल अपने लाभ को देखकर ही चुनाव में टिकट दे रहे हैं। बदकिस्मती यह है कि इस कौम को सभी पार्टी नजरअंदाज कर रही हैं। बीजेपी भी इससे अछूती नहीं है, जबकि मुस्लिमों की वोट भाजपा समेत सभी दल चाहते हैं। लेकिन टिकट देने के नाम पर चुप्पी साध जाते हैं। यही हाल रहा तो इनकी आवाज उठनी बंद हो जाएगी।
- गौहर सिद्दीकी, संयोजक- सद्भावना मंच
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पश्चिम उप्र के सहारनपुर से बसपा से माजिद अली और कांग्रेस से इमरान मसूद मैदान में है। कैराना से सपा ने इकरा हसन को चुनाव में उतारा है। अमरोहा से बसपा ने डॉ. मुजाहिद हुसैन और सपा ने संभल से जियाउर्रहमान को प्रत्याशी बनाकर मुस्लिम मतदाताओं को साधने का काम किया है।