35 फीसदी नौकरीपेशा महिलाएं शिकार
वर्तिका की शोध निर्देशक प्रो. डॉ सीमा जैन बताती हैं कि शोध में यह भी पाया गया कि घरेलू महिलाओं की अपेक्षा नौकरीपेशा महिलाएं घरेलू हिंसा से ज्यादा अवसाद में हैं। 35 फीसदी नौकरीपेशा महिलाओं ने खुद माना कि उनके तनाव का प्रमुख कारण घरेलू हिंसा है। 15 फीसद महिलाओं में शारीरिक बदलाव व अन्य कारणो ंसे तनाव मिला। मगर अधिकांश महिलाएं पति की प्रताड़ना से दुखी मिलीं।
60 दिन में न्याय का प्रावधान
एडवोकेट अंकुर शर्मा के अनुसार 26 अक्तूबर, 2006 से लागू घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत पीड़ित महिला धारा 12 के तहत अपने थाना क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट या विशेष अदालत के समक्ष आवेदन कर सकती है। ऐसे प्रार्थनापत्र पर 60 दिन में मुकदमे का निस्तारण किए जाने का भी प्रावधान है।
जागरूकता के कारण पीड़ा अधिक
ग्रामीण महिलाएं आज भी पति के मारने-पीटने, अत्याचार को नियति मानती हैं। दूसरी ओर शहरी महिलाएं शिक्षित, सशक्त और जागरूक होने के कारण इसका विरोध करती हैं। वे अपने अधिकार जानती हैं इसलिए उनकी पीड़ा भी अधिक होती है। - प्रो. डॉ. अंजुला राजवंशी, शिक्षक समाजशास्त्र, आरजी पीजी कॉलेज