कोरोना के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कभी 40 मरीज मिलते हैं तो कभी 33, 26 और 25 लोग इसके चपेट में आ जाते हैं। महामारी के इस दौर में भी उम्मीद बाकी है। मेरठ में अब तक 18 हजार 315 लोग ऐसे हैं, जो हिम्मत दे रहे हैं। उन्होंने अपनी जांच कराई और उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। यानी कोरोना उन्हें छू नहीं सका।
अभी महज सात प्रतिशत लोग ही कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें भी ज्यादातर वे लोग हैं जिन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया है। लिहाजा घबराने की जरूरत नहीं है। समझदारी से सोशल डिस्टेंसिंग और एहतियात कदम उठाने की जरूरत है। जो लोग कोरोना की चपेट में आए हैं इनमें अधिकांश युवा और कामकाजी लोग हैं और उसकी वजह यह है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का कम पालन कर रहे हैं। 19 साल से लेकर 50 साल उम्र वालों की कैटेगरी का प्रतिशत तो 60 फीसदी से भी ज्यादा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि इस रोग से कोई भी प्रभावित हो सकता है। इस बीमारी को हराने में सभी सक्षम हैं। इस वायरस से जुड़ी बारीकियों में से एक बात यह है कि किसी व्यक्ति में यह संक्रमण बहुत हल्का हो सकता है, जहां संक्रमण के कोई संकेत या लक्षण नहीं दिखते, लेकिन फिर भी वह व्यक्ति इस वायरस का वाहक बन सकता है और उस व्यक्ति से यह दूसरे व्यक्ति में पहुंच सकता है, इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग रखनी चाहिए।