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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: बैंकों की खुली पोल, किसानों के भुगतान पर चल रहा ये बड़ा खेल

Thu, 07 Jan 2021 12:40 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • एस्क्रो अकाउंट से सीधे किसानों के खातें में भेजने के शासनादेश पर अमल नहीं 
  • ब्याज के लिए लटकाया जा रहा गन्ने का भुगतान 
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गन्ना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गन्ना किसानों के लिए बकाया भुगतान हासिल करने में कदम-कदम पर संकट हैं। चीनी मिलों के भुगतान के बाद ब्याज के फेर में गन्ना समितियां और बैंक इसे समय से किसानों के खातों में नहीं पहुंचा रहे हैं। इससे एस्क्रो अकाउंट के जरिये एक ही दिन में किसानों के खातें में पैसा पहुंचाने के शासनादेश का खुला उल्लंघन हो रहा है। 

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किसानों को गन्ना बकाया भुगतान के लिए शासन ने टैगिंग आदेश के साथ ही एस्क्रो अकाउंट की व्यवस्था की है। टैगिंग आदेश के अनुसार गन्ना मूल्य के भुगतान हेतु बैंक अग्रिम अथवा उत्पादों की बिक्री से उपलब्ध धन का 85 फीसदी अंश एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर करने और एस्क्रो अकाउंट में उपलब्ध धनराशि का शत-प्रतिशत उपयोग किसानों के गन्ना मूल्य एवं समिति के अंशदान के भुगतान में करना है। बावजूद इसके गन्ना किसानों की एडवाइस का भुगतान सीधे एस्क्रो अकाउंट से न कर यह धनराशि एस्क्रो अकाउंट से संबंधित गन्ना समितियों द्वारा किसी अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।  

गन्ना समितियों और बैंकों का गठजोड़ हावी
इस राशि के किसानों के खाते में पहुंचने में कम से कम सात दिन लगते हैं। इससे गन्ना समितियों को लाखों रुपये का ब्याज मिल जाता है वहीं बैंकों को बैलेंस मेंटेन रखने का फायदा मिल जाता है। पूरे खेल पर नजर डालें तो जनपद की एक मिल द्वारा दिए अगर एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया और उसे समिति ने अपने खाते में सात दिन रोक लिया तो 3.50 फीसदी सालाना ब्याज की दर से समिति को 6700 रुपये ब्याज मिल जाता है। इस हिसाब से अगर जनपद की मिलें 100 करोड़ रुपये का भुगतान करें तो सात दिन में समितियों को 6,70,600 रुपये मिल जाते हैं।
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एक सप्ताह बाद पहुंची बकाया राशि
मेरठ जनपद की किनौनी, मोहिउद्दीनपुर, दौराला और सकौती मिल ने 16 दिसंबर, 2020 को 35.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसे किसानों तक पहुंचने में एक सप्ताह लग गया। डालमपुर निवासी किसान जयराज सिंह ने बताया कि एक सप्ताह बाद उनके खातें में भुगतान आया। वहीं मवाना, किनौनी, दौराला और नंगलामल मिल ने 29 दिसंबर, 2020 को 112.54 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया था। इसमें से दौराला मिल द्वारा एस्क्रो अकाउंट से भेजा गया भुगतान किसानों को अगले दिन मिल गया, लेकिन बाकी मिलों का पैसा करीब एक सप्ताह बाद मिला।

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देरी के मामले दिखवाएंगे 
चीनी मिलों से किसानों की एडवाइस के अनुसार एस्क्रो अकाउंट में ही भुगतान लिया जाता है, लेकिन एडवाइस का मिलान करने में समय लगता है। भुगतान में देरी के मामले दिखवाकर इसे सही कराया जाएगा। - डॉ. दुष्यंत कुमार, जिला गन्ना अधिकारी

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