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लॉकडाउन में पूरी तरह हार चुकी थीं ये नेशनल खिलाड़ी, मन में आए खौफनाक ख्याल, फिर जिंदगी को ऐसे बदला, तस्वीरें

Sat, 21 Nov 2020 01:28 PM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
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अपने रेस्टोरेंट पर काम करतीं श्वेता भारद्वाज। संवाद - फोटो : अमर उजाला
खेल का मैदान हो या फिर जीवन की भागदौड़, खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता। हैंडबॉल में नेशनल खेल चुकीं श्वेता भारद्वाज इसकी नजीर बनी हैं। लॉकडाउन ने उनकी ताइक्वांडों की कोच की नौकरी छीन ली। वह एक बार को इतना हताश हो गईं कि अपनी जिंदगी खत्म करने की सोची लेकिन खेल के मैदान पर मिली हार से उन्होंने सबक लेकर आपदा को अवसर में बदला और हाईवे पर रेस्टोरेंट खोलकर नई पारी शुरू कर दी।
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श्वेता भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला
पल्लवपुरम फेस-2 निवासी श्वेता ताइक्वांडों की भी अच्छी खिलाड़ी रही हैं। श्वेता के जीवन में कई उतार चढ़ाव आए। कई साल पहले पति की मौत के बाद बेटे अनंत को कामयाब बनाने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने लोहिया नगर स्थित एक कॉलेज में ताइक्वांडों के कोच के रूप में नौकरी शुरू की। बेटे का शिलांग में होटल मैनेजमेंट में दाखिला कराया।
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श्वेता भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में दूसरा झटका
पति की मौत के बाद श्वेता को लॉकडाउन ने तगड़ा झटका दिया। कोच की नौकरी जाने के बाद फिर आर्थिक स्थिति से जूझना पड़ा। घर चलाने के साथ बेटे की फीस जमा करना चुनौती बन गया। हताशा में कई बार आत्महत्या तक का प्रयास किया। छह माह से ज्यादा परेशानी के बाद एक दिन नौकरी मांगने मोदीपुरम में वेटलिफ्टिंग के नेशनल कोच अमरनाथ त्यागी के पास पहुंचीं। नया काम करने की चुनौती के बीच श्वेता ने रेस्टोरेंट खोलने का मन बनाया तो कोच त्यागी ने अपनी दुकान के साथ सहायता दी। कुछ दिन परेशानी हुई, फिर हाईवे स्थित डीएमए कॉलेज के बाहर अब वे रेंस्टोरेंट चला रही हैं। 
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श्वेता भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला
हार से सबक लें जीत मिलेगी
श्वेता का कहना है कि बुरे दौर से गुजरकर एक ही सबक सीखा कि जिंदगी में मिली हार से न घबराकर दोबारा से तैयारी करेंगे तो जीत मिलेगी। प्रधानमंत्री भी आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं। मुझे बचपन से अच्छा खाना बनाने का शौक था, पता नहीं था कि यह शौक जिंदगी बन जाएगा।
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कोच अमरनाथ - फोटो : अमर उजाला
एक महिला होने के नाते सम्मान
कोच अमरनाथ त्यागी कहते हैं कि मैं श्वेता को पहले नहीं जानता था। वे मेरे प्रतिष्ठान पर आईं तो पता चला कि वह खिलाड़ी हैं। पति की मौत के बाद एक महिला कैसे चुनौतियों से लड़ रही थीं, खिलाड़ी के साथ उसके सम्मान में मैंने उनका सहयोग किया।

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