खेल का मैदान हो या फिर जीवन की भागदौड़, खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता। हैंडबॉल में नेशनल खेल चुकीं श्वेता भारद्वाज इसकी नजीर बनी हैं। लॉकडाउन ने उनकी ताइक्वांडों की कोच की नौकरी छीन ली। वह एक बार को इतना हताश हो गईं कि अपनी जिंदगी खत्म करने की सोची लेकिन खेल के मैदान पर मिली हार से उन्होंने सबक लेकर आपदा को अवसर में बदला और हाईवे पर रेस्टोरेंट खोलकर नई पारी शुरू कर दी।