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एक्सक्लूसिव: 1857 की क्रांति से जुड़े स्थान बनाए जाएंगे पर्यटन स्थल, स्वतंत्रता के इतिहास से कराएंगे रू-ब-रू

Thu, 14 Jan 2021 12:57 PM IST
कपिल kapil प्रदीप मिश्र, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ कैंट में स्थित औघड़नाथ मंदिर में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के उद् गम स्थल पर अमर शहीदों की पुण्य स्मृति में बना स्मारक। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में अनूठे ढंग का पर्यटन शुरू करने की तैयारी है। इसमें मनोरंजन और सैर-सपाटा तो होगा ही, साथ ही ये हमें अपनी स्वतंत्रता के इतिहास से भी रू-ब-रू कराएगा। ये पर्यटन ऐसा होगा, जिसके जरिए पर्यटक 1857 में मेरठ से शुरू हुई क्रांति के खास स्थलों, इस दौरान हुई कुर्बानियों और शहीद स्मारकों और 1947 तक के स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों के बारे में जान सकेंगे।

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दरअसल, पर्यटन विभाग चार फरवरी, 2022 को चौरीचौरा कांड के सौ वर्ष पूरे होने पर एक साल तक इन स्थलों को संवारने और सरंक्षरण का विशेष कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। चार फरवरी, 1922 को असहयोग आंदोलन के बीच गोरखपुर जिले के चौरीचौरा कस्बे में भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक चौकी को आग लगा दी थी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए थे। अब इन स्थानों समेत अन्य स्थलों पर हेरिटेज वॉक बनाए जाएंगे। 

मेरठ के कैंट क्षेत्र में चार किलोमीटर के दायरे में ऐसे 17 स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन्हें  हेरिटेज वॉक के रूप में विकसित किया जाना है। मेरठ में 10 मई, 1857 को सैनिक विद्रोह हुआ था। 90 साल बाद 1947 में अंग्रेजों की भारत से विदाई का इसे अहम कारण माना जाता है। 1857 की क्रांति पर यहां एकमात्र संग्रहालय भी बनाया गया है।
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ग्रामीण पर्यटन के लिए भागीरथी सर्किट
गंगा किनारे के गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार भागीरथी सर्किट पर भी काम करने जा रही है। मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत इन स्थानों पर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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संस्कार, संस्कृति और स्मृति से जोड़ेंगे पर्यटक
प्रदेश के पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. नीलकंठ तिवारी के मुताबिक, केंद्र और प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों ने यूपी में पर्यटन को आगरा के ताजमहल के इर्द-गिर्द समेट दिया था। इसके चलते अन्य स्थल उपेक्षित होते गए। योगी आदित्यनाथ की सरकार पर्यटन को संस्कार, संस्कृति और स्मृति से जोड़ने जा रही है। एक साल के अंदर इसके परिणाम ही नजर नहीं आएंगे। पर्यटक इन स्थानों पर जाकर अपने समृद्ध अतीत को बेहतर ढंग से अनुभव कर सकेंगे। योजना के तहत लखनऊ में रेजीडेंसी, कानपुर के बिठूर, फैजाबाद, बलिया और झांसी के अलावा अन्य स्थानों पर भी काम शुरू किया जाएगा।

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