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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: विकास और निर्माण कार्यों से भटका एमडीए, सामने आई बड़ी सच्चाई

Tue, 13 Apr 2021 04:28 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, दीपक भारद्वाज, मेरठ

सार

मेरठ में एमडीए शहर के विकास का खाका तैयार करने से भटक गया है। पिछले एक साल से आम लोगों से जुड़ी एक भी योजना धरातल पर नहीं आ सकी है।
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मेरठ विकास प्राधिकरण कार्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में एमडीए शहर के विकास का खाका तैयार करने से भटक गया है। पिछले एक साल से आम लोगों से जुड़ी एक भी योजना धरातल पर नहीं आ सकी है प्राधिकरण के अधिकारी उन अवैध निर्माणों को ढहाने में लगे हैं, जिन्हें इनके निर्माण के समय अनदेखा किया जाता है। 

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स्थानीय स्तर पर पार्क, आवासीय या व्यावसायिक क्षेत्र के विकास की किसी योजना पर कार्य नहीं हो सका है। अब महायोजना 2031 पर प्राधिकरण का जोर है, जबकि सरकार की ओर से इसे दस वर्ष से बनाया जा रहा है। हालात यह है कि अभी तक अगले साल के बजट पर बैठक भी नहीं हो सकी है।

इसकी एक वजह एमडीए उपाध्यक्ष से लेकर अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देना भी बताया जा रहा है। उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी पर संभागीय खाद्य नियंत्रक, मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद पर नोएडा विकास प्राधिकरण, सहायक नगर नियोजक गौर्की कौशिक पर सहारनपुर विकास प्राधिकरण, वित्त नियंत्रक अनिता सिंह पर मेडिकल कॉलेज और मुख्य अभियंता देवेंद्र शर्मा पर हापुड़ विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त प्रभार है। 
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फाइलों में अटके काम

दिव्यांगजन पार्क
पिछले एक वर्ष से कभी प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कभी अटक जाती है। इसका निर्माण उज्जैन की तर्ज पर होना था।

योगा और हर्बल पार्क
शताब्दी नगर में स्थान तय हो गया था। बाद में अधिकारियों ने बजट न होने की बात बताते हुए फाइल बंद कर दी।  

सर्किट हाउस से आंबेडकर चौराहे तक सड़क
मॉडल सड़क बनाने का दावा था। एमडीए कार्यालय के सामने सड़क पर लाइटिंग आदि की व्यवस्था भी की जानी थी।

हाईवे पर टॉयलेट   
उपाध्यक्ष ने कई बार हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए स्थानों का निरीक्षण किया। काम कुछ नहीं हुआ।

खाली फ्लैट
जिले में एमडीए के एक हजार से अधिक फ्लैट खाली हैं। इनकी हालत भी खराब है। इन्हें उपयोगी नहीं बनाया जा सका। 

गंगानगर में यू और एक्स पॉकेट का निर्माण
निर्माण प्रक्रिया शुरू करने पर व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियां बेचने के लिए विज्ञापन की योजना ही बनती रहती है।

रेन वाटर हार्वेंस्टिंग
शासन के पहले के निर्देश के अलावा कैच द रेन अभियान में भी निर्देश दिए हैं। दो वर्षों से बार-बार टेंडर ही निकाले गए।

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