मुजफ्फरनगर में नगर पालिका के एक जेई ने एक ही सड़क के दो इस्टीमेट बनाकर टेंडर भी जारी करा दिए। यही नहीं दो ठेकेदारों के नाम काम भी जारी हो गए। मामला तब खुला, जब एक ठेकेदार का भुगतान होने के बाद दूसरे का भुगतान करने से पहले चेयरपर्सन ने स्थलीय निरीक्षण किया। स्थलीय निरीक्षण में सड़क की पोल खुल गई।
नगर पालिका परिषद में तैनात जेई मूलचंद ने अफसरों की आंखों में भी धूल झोंक दी। एक ही सड़क के दो टेंडर तैयार कर डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी से अनुमति भी ले ली। एक टेंडर में लोहिया बाजार की इस सड़क का नाम कबाड़ी वाली गली से बड़ के पेड़ तक कर दिया और दूसरे टेंडर में इसी सड़क का नाम मस्जिद से मोतीराम टेंट वाले तक कर दिया। एक ही जगह को दो जगह दर्शा दिया। यही नहीं समाचार पत्रों में दोनो टेंडर भी जारी करा दिए। बड़ी बात यह हुई कि एक ही सड़क का दो ठेकेदारों को टेंडर भी जारी कर दिया गया। सड़क का प्रोसिजर दोनों टेंडर का एक साथ चला।
बताया गया कि एक ठेका पांच नवंबर 2019 को कार्तिक इंफ्रा के नाम चार लाख 18 हजार में छोड़ा गया, जबकि इन्हीं तिथि में दूसरा ठेका अनिल कुमार के नाम छह लाख 98 हजार 675 में छोड़ दिया गया। अनिल कुमार इस सड़क का निर्माण कर 15 जुलाई 2020 को भुगतान ले चुके हैं। कार्तिक के नाम की दूसरी फाइल जब भुगतान के लिए गई, तो चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने स्थलीय निरीक्षण में मामला पकड़ लिया।
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चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने बताया कि यह मामला बहुत गंभीर है। जेई ने अफसरों और उनको धोखे में रखकर यह कार्य किया। दूसरे ठेकेदार का भुगतान रोकने के साथ ही उससे यह शपथ पत्र लिया गया है कि उक्त सड़क पहले से ही बनी है। इस मामले में जो लोग दोषी हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है।
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