लगें नई मिल और बढ़े पुरानी की क्षमता
अगर यही हाल रहा तो सरकार को न केवल नई चीनी मिल लगानी होगी, बल्कि पुरानी मिलों की क्षमता में भी वृद्धि करानी होगी। इसके बाद ही किसानों द्वारा उत्पादित गन्ने की पेराई की जा सकेगी। इसके साथ ही एथनॉल प्लांट भी लगाने होंगे ताकि चीनी पर निर्भरता कम हो सके। किसानों को भी गन्ने के अलावा दूसरी फसलों पर ध्यान देना होगा।
चीनी उद्योग और विभाग के सामने पेराई की चुनौती
इस बार मंडल की औसत उपज में करीब नौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर की कमी की संभावना है। इसके बावजूद गन्ना रकबा ज्यादा होने के चलते चीनी उद्योग और विभाग के सामने पेराई की चुनौती है। मिल क्षमता से ज्यादा गन्ना होने के चलते तय पेराई अवधि में इसकी पेराई नहीं हो पाएगी। लेकिन विभाग किसानों का पूरा गन्ना खरीद कराने के लिए संकल्पित है।
- राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त, मेरठ परिक्षेत्र
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/