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एक्सक्लूसिव: सरकार के लिए चुनौती बना बढ़ता गन्ना रकबा और उत्पादन, खास रिपोर्ट में जानिए मेरठ मंडल का हाल

Sat, 03 Oct 2020 03:52 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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चीनी मिल - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में बढ़ते गन्ने के रकबे और बंपर उत्पादन ने गन्ना उद्योग से लेकर गन्ना विभाग तक के होश उड़ा दिए हैं। गन्ने की बहुतायत के सामने पिछले सत्र में ही मिलों की पेराई क्षमता फेल हो गई थी। वहीं, पिछले साल के मुकाबले मंडल में इस साल 1197 हेक्टेयर गन्ना रकबा ज्यादा है। जबकि मेरठ जिले का रकबा 2904 हेक्टेयर बढ़ा है। सैंपल सर्वे में भले ही विभाग इस बार औसत उत्पादन में प्रति हेक्टेयर नौ क्विंटल की कमी आंक रहा हो, लेकिन मिलों की क्षमता, 180 दिन के सीजन और गन्ना उत्पादन के चलते मंडल में करीब 560 लाख क्विंटल गन्ना पेराई से बच जाएगा। जबकि मेरठ जनपद में 151 लाख क्विंटल गन्ना पेराई से बचेगा।

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मेरठ मंडल में स्थापित 16 चीनी मिल किसानों का गन्ना खरीदती हैं। इन मिलों की कुल पेराई क्षमता नौ लाख 73 हजार क्विंटल प्रतिदिन है। औसतन 90 फीसदी क्षमता से अगर सभी मिलें 180 दिन पेराई करेंगी तो 1576 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई ही कर पाएंगी। जबकि मंडल में तीन लाख 46 हजार 318 हेक्टेयर रकबे और 881 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन के हिसाब से 3051 लाख क्विंटल गन्ना है। 

इस गन्ने से कोल्हू, खांडसारी और बीज आदि का 30 फीसदी गन्ना निकाल दें तो 2136 लाख क्विंटल गन्ना बचता है जो मिलों की पेराई क्षमता से 560 लाख क्विंटल ज्यादा है। यही अवशेष गन्ना उद्योग और सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ है। इसकी पेराई के लिए सरकार को मिलों को तय सीजन अवधि से ज्यादा दिन तक चलाना होगा। 
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मेरठ मंडल और मेरठ जिले का हाल
स्थिति                                                                                           मेरठ मंडल                              मेरठ जिला
कुल मिल                                                                                             16                                           6
मिलों की पेराई क्षमता                                                                      973000 क्विंटल प्रतिदिन             488000 क्विंटल प्रतिदिन
गन्ना रकबा                                                                                          346318 हेक्टेयर                       147810 हेक्टेयर
पिछले साल से ज्यादा रकबा                                                                      1197 हेक्टेयर                             2904 हेक्टेयर
अनुमानित कुल गन्ना                                                                                  3051 लाख क्विंटल                    1345 लाख क्विंटल 
30 फीसदी गन्ना कोल्हू, क्रशर और बीज के बाद शेष गन्ना                                  2136 लाख क्विंटल                    941 लाख क्विंटल
90 फीसदी क्षमता के आधार पर 180 दिन में मिल करेंगी पेराई                             1576 लाख क्विंटल                   790 लाख क्विंटल 
शेष बचेगा गन्ना                                                                                              560 लाख क्विंटल                   151 लाख क्विंटल 

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लगें नई मिल और बढ़े पुरानी की क्षमता 
अगर यही हाल रहा तो सरकार को न केवल नई चीनी मिल लगानी होगी, बल्कि पुरानी मिलों की क्षमता में भी वृद्धि करानी होगी। इसके बाद ही किसानों द्वारा उत्पादित गन्ने की पेराई की जा सकेगी। इसके साथ ही एथनॉल प्लांट भी लगाने होंगे ताकि चीनी पर निर्भरता कम हो सके। किसानों को भी गन्ने के अलावा दूसरी फसलों पर ध्यान देना होगा।  

चीनी उद्योग और विभाग के सामने पेराई की चुनौती
इस बार मंडल की औसत उपज में करीब नौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर की कमी की संभावना है। इसके बावजूद गन्ना रकबा ज्यादा होने के चलते चीनी उद्योग और विभाग के सामने पेराई की चुनौती है। मिल क्षमता से ज्यादा गन्ना होने के चलते तय पेराई अवधि में इसकी पेराई नहीं हो पाएगी। लेकिन विभाग किसानों का पूरा गन्ना खरीद कराने के लिए संकल्पित है। - राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त, मेरठ परिक्षेत्र

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