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एक्सक्लूसिव: रिपोर्ट देख उड़े होश, 10 महीने में हेपेटाइटिस-एचआईवी के शिकार मिले 435 युवा

Thu, 05 Nov 2020 01:08 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सांकेतिक तस्वीर
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मेरठ के कई युवाओं को पता नहीं चला और वे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी के चक्रव्यूह में फंस गए। सरकारी अस्पतालों के कैंपों और किसी अपने के लिए किए गए रक्तदान करने के बाद जब उनकी रिपोर्ट आई तो इनके होश उड़ गए।

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जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में इस साल 10 महीने के दौरान 435 रक्तदान करने वाले बीमार निकले हैं। इनमें अधिकांश की उम्र 20 से 45 के बीच है।

मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में एक जनवरी से 31 अक्तूबर 2020 तक 304 रक्तदाता बीमार मिले हैं। इनमें 12 एचआईवी पॉजिटिव थे, 150 हेपेटाइटिस सी और 142 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित थे। इसी तरह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट में आठ लोग एचआईवी पॉजिटिव, 62 हेपेटाइटिस-बी और 61 हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित निकले।

मेडिकल ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. मोनिका राठी ने बताया कि जांच के बाद बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया गया है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि ये रिपोर्ट देखकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया।
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ऐसे होती है बीमारी
हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के कारण लगभग वही हैं, जो एचआईवी संक्रमण के होते हैं।
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल करना
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा मिलना
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना

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एचआईवी
इस वायरस की वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी पॉजिटिव होने से एड्स होने तक के अंतराल को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है।

हेपेटाइटिस बी
यह संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लिवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं, जिससे लिवर सिरसिस या लिवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

हेपेटाइटिस सी
आम बोलचाल की भाषा में इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, एचसीवी वायरस की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता है और जानलेवा हो जाता है। मेडिकल कॉलेज में इसका इलाज निशुल्क होता है।

नशीली दवाओं से संक्रमण
इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग एचसीवी संक्रमण का सबसे आम रास्ता है। कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है।

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