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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: निर्यात बढ़ने से महंगे हुए सूती धागे के दाम, इस वजह से आया उछाल

Mon, 21 Dec 2020 03:40 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

  • - 175 रुपये किलो वाली कॉटन हो गई 228 की
  • - बनने शुरू हो गए हैं गर्मी के सीजन के लिए उत्पाद
  • - 300 टन कॉटन प्रतिमाह सहारनपुर में मंगाई जाती है
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cotten yarn - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में होजरी कारोबार पर बार-बार संकट आ रहा है। पहले लॉकडाउन में कारोबार प्रभावित हुआ तो अब कॉटन के धागे का निर्यात बढ़ने से दाम चढ़ गए हैं। होजरी उत्पादों में प्रयोग होने वाले रॉ मैटीरियल के दाम बढ़ने से लागत बढ़ गई है। इससे अनुमान है कि आगामी गर्मी के सीजन में होजरी उत्पादों पर महंगाई का असर रहेगा।
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कॉटन यार्न का दाम बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें पहला कारण निर्यात में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। डेढ़ महीना पूर्व जिस कॉटन यार्न का 175 से 180 रुपये प्रति किलोग्राम था, वह अब 225 से 230 रुपये प्रति किलो हो गया है।

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यानि 25 प्रतिशत तक दाम बढ़ गए हैं। इसके अलावा दूसरा कारण कॉटन यार्न मिलों के संचालकों की मनमानी भी बताई जा रही है। क्योंकि कपास की खेती भी अच्छी हुई है, बावजूद कॉटन के दाम बढ़ना सवाल खड़े कर रहा है। वजह जो भी हो, मगर कॉटन यार्न के दाम में उछाल से होजरी कारोबारी परेशान हैं।

सिर्फ कॉटन यार्न ही नहीं, बल्कि इलास्टिक के दाम में भी इजाफा हुआ है। इलास्टिक को दिल्ली, फरीदाबाद, सूरत और अहमदाबाद से मंगाया जाता है। इसके दाम में 15 से 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो इलास्टिक पूर्व में छह रुपये मीटर थी, अब सवा सात रुपये मीटर तक आ रही है। इसके अलावा पैकिंग में प्रयोग की जाने वाली पॉलिथीन भी 140 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 160 रुपये किलो हो गई है।

होजरी कारोबार की स्थिति
होजरी कारोबार के लिए उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला विख्यात है। यहां पर छोटी बड़ी 350 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें होजरी के उत्पादों में बनियान, कच्छा, जुराब, लेगी, टॉप, लोवर आदि बनाए जाते हैं।

सहारनपुर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक होजरी उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। हर महीने 300 से 400 टन कॉटन सहारनपुर के कारोबारियों द्वारा मंगाई जाती है।
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शुरू कर दिए गर्मी में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद
सर्दी के सीजन के लिए कारोबारियों को गर्मी में ही होजरी उत्पाद तैयार कराने होते हैं तो गर्मी के सीजन में उपयोग होने वाले उत्पाद सर्दियों में तैयार कराए जाते हैं। इन दिनों बनियान सहित गर्मी में इस्तेमाल होने वाले होजरी उत्पाद बनाने का कार्य शुरू हो गया है, लेकिन इसमें कॉटन यार्न की महंगाई परेशानी बन गई है।

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 कारोबारी बोले, समझ नहीं आ रहा क्यों बढ़े दाम
-सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव घनश्याम माहेश्वरी का कहना है कि कपास की फसल भी ठीक थी और निर्यात ज्यादा नहीं बढ़ा है, फिर कैसे दाम बढ़ गए, समझ नहीं आ रहा।

- होजरी कारोबारी मनजीत अरोड़ा और विवेक मनोचा का कहना है कि कॉटन यार्न और अन्य रॉ मैटिरियल के दाम बढ़ने से दिक्कत आ रही है। सरकार को ध्यान देना चाहिए, ताकि बगैर किसी वजह से दाम बढ़ने से रोके जा सकें।

- कॉटन यार्न के डीलर सुमित रामपाल का कहना है कि कॉटन यार्न का निर्यात बढ़ा है। कोरिया, वेनेजुएला, पेरु, बांग्लादेश और चीन आदि देशों में कॉटन यार्न की डिमांड में इजाफा बताया जा रहा है, इसी कारण दाम में उछाल आया है।
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