फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: नायब तहसीलदार की भर्ती में फर्जीवाड़ा होने के आरोप, डीएम से शिकायत

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। नायब तहसीलदार शुभम अग्रवाल की भर्ती में फर्जीवाड़ा होने का आरोप लगाकर डीएम मेरठ डॉ. वीके सिंह से शिकायत की गई है। आरोप है कि शुभम ने विरोधाभासी विकलांगता प्रमाणपत्रों के आधार पर यूपीएससी और यूपीपीएससी भर्ती में पीडब्ल्यूबीडी/पीडी श्रेणी का लाभ उठाया है। शिकायतकर्ता आशीष गुप्ता ने डीएम से जांच और प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है।
विज्ञापन

डीएम को दिए गए शिकायत पत्र में आशीष गुप्ता ने बताया कि शुभम अग्रवाल ने 2019 में परीक्षा देकर नायब तहसीलदार बने और सिविल सेवा परीक्षा 2024 में पीडी कोटे के अंतर्गत चयन हुआ है। शुभम फिलहाल मेरठ एडीएम एलए कार्यालय में नायब तहसीलदार पद पर तैनात है। आरोप है कि यूपीएससी द्वारा कराई गई मेडिकल जांच में एआईआईएमएस दिल्ली सहित उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्डों ने उन्हें शून्य से 8.64 प्रतिशत दिव्यांग पाया, जो पीडीबीडी श्रेणी के लिए निर्धारित न्यूनतम 40 प्रतिशत मानक को पूरा नहीं करता। दस्तावेजों के अनुसार 2016 में लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ द्वारा जारी प्रमाणपत्र में शुभम अग्रवाल को 40 प्रतिशत दिव्यांग दर्शाया गया।
आरोप है कि वर्ष 2025 में एआईआईएमएस की जांच में भी उनकी दिव्यांगता मात्र एक प्रतिशत आंकी गई। यह अंतर सामान्य मेडिकल मतभेद नहीं बल्कि हेराफेरी की ओर इशारा करता है। खास बात यह है कि प्रस्तुत प्रमाणपत्रों में बीमारी को नोन-प्रोग्रेसिव बताया गया। ऐसे में शून्य से सीधे 67.84 प्रतिशत तक पहुंचने पर सवाल उठाया है।
विज्ञापन


-
शिकायतकर्ता आशीष गुप्ता मेरे बहनोई हैं। वह मेरी बहन के साथ मारपीट करते थे। इस पर गाजियाबाद पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। आशीष जेल भी गए थे। उनके द्वारा मेरी भर्ती में फर्जीवाड़ा करने की शिकायत गाजियाबाद में भी की। इसकी जांच के लिए बोर्ड गठित हुआ, इसमें आरोप निराधार पाए गए। मुझे और मेरे परिवार को बदनाम करने की साजिश चल रही है। शुभम अग्रवाल, नायब तहसीलदार
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें