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खींचतान के 18 घंटे: अकेले पड़े अतुल... हार नहीं मानी तो योगेश ने मारी बाजी, अखिलेश की कोठी पर रातभर जागे दोनों

Fri, 05 Apr 2024 04:53 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ

सार

Meerut News : समाजवादी पार्टी में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट को लेकर करीब 18 घंटे तक खूब खींचतान चली। आखिर में अतुल प्रधान अकेले पड़ गए और योगेश वर्मा ने बाजी मार ली।
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अखिलेश यादव, योगेश वर्मा, अतुल प्रधान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर खींचतान तो शुरू से ही रही, लेकिन बुधवार दोपहर दो बजे से लेकर बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक (18 घंटे) सबसे ज्यादा जोर आजमाइश के रहे। आखिर में विधायक अतुल प्रधान अकेले पड़ गए। योगेश वर्मा जीत गए। योगेश लखनऊ में डेरा डाले हुए थे। बाकी दावेदारों में शहर विधायक रफीक अंसारी, राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा का भी उन्हें साथ मिला, जबकि टिकट के लिए अतुल समर्थन नहीं जुटा सके। 

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बुधवार को अतुल प्रधान ने कलक्ट्रेट में नामांकन के वक्त खींचतान शुरू हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें पता चला कि लखनऊ में पूर्व विधायक योगेश वर्मा डटे हैं। वर्मा ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन टिकट बदले जाने और सिंबल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। अतुल प्रधान ने रात में लखनऊ पहुंच कर अपना पक्ष रखा। योगेश का तर्क था कि मेरठ सीट पर दलित-मुस्लिम समीकरण है, इसलिए दलित प्रत्याशी पर दांव खेला जाना चाहिए।

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रात भर अखिलेश यादव की कोठी के बाहर जागते रहे अतुल-योगेश 
योगेश और अतुल प्रधान बुधवार की रात से लेकर बृहस्पतिवार की सुबह तक अखिलेश यादव की कोठी के बाहर जमे रहे। रात भर जागते रहे। अखिलेश यादव सुबह साढ़े सात बजे कार्यालय पहुंचे और सिंबल पर हस्ताक्षर कर योगेश वर्मा को दिया। इस दौरान अतुल प्रधान भी वहां थे। उन्होंने कहा कि उनका टिकट न काटा जाए। लेकिन अखिलेश यादव ने उनकी बात नहीं मानी।

मायूस अतुल के इस्तीफा देने की चर्चा फैली
टिकट कटने पर अतुल प्रधान मायूस हो गए। चर्चा हुई कि अतुल ने विधायक और पार्टी से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। हालांकि, इन सब से अतुल ने इंकार किया। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी का फैसला स्वीकार करते हैं। 

गिले-शिकवे दूर किए, पर बात नहीं बनी
अतुल ने टिकट से पहले दावेदारों से मान मनोव्वल कर ली थी। उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, शहर विधायक रफीक अंसारी, राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा से पुराने गिले शिकवे मिटाने की कोशिश की। आखिर में योगेश भारी पड़ गए। वर्मा के नामांकन में रफीक अंसारी, आकिल मुर्तजा और राजपाल सिंह साथ रहे। अतुल के नामांकन में ये लोग शामिल नहीं थे। शाहिद मंजूर उमरा करने सऊदी अरब गए हुए हैं।

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अंतर्कलह : 20 दिन में तीन टिकट 
पार्टी में अंदरूनी कलह का नतीजा है कि 20 दिन में तीन टिकट बदलने पड़े। 15 मार्च को सपा ने सूची जारी कर भानु प्रताप सिंह को उम्मीदवार घोषित किया। बाहरी उम्मीदवार बता कर उनका विरोध होने लगा। एक अप्रैल को अतुल प्रधान को उम्मीदवार घोषित कर दिया। फिर भी विरोध नहीं थमा।

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टिकट कटने का फैसला कठिन होता है, लेकिन पार्टी का निर्णय स्वीकार है। प्रत्याशी को चुनाव लड़वाएंगे। - अतुल प्रधान, विधायक, सपा 

टिकट को लेकर सब प्रयास करते ही हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के भरोसे पर खरा उतरेंगे। सबको साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे। - योगेश वर्मा, पूर्व विधायक हस्तिनापुर
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