विश्व एड्स दिवस आज
एड्स करता जानलेवा वार... सिर्फ जानकारी ही उपचार
मेडिकल कॉलेज में चल रहा चार हज़ार मरीज़ों का इलाज
निशुल्क इलाज होता है, पहचान भी नहीं की जाती उजागर
90 फीसदी मरीजों में एड्स का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लापरवाही और जागरूकता का अभाव, नतीजा ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी)। मेडिकल के विशेषज्ञ बताते हैं कि एड्स का सबसे बड़ा कारण असुरिक्षत यौन संबंध है। करीब 90 फीसदी मरीजों में यही वजह मिली है। लगभग पांच फीसदी को संक्रमित रक्त चढ़ने से और 5 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्हें पैदाइश से ही यह बीमारी थी। इससे बचने का तरीका इसकी जानकारी और जागरूकता है।
एड्स एक ऐसी महामारी है जो पूरे विश्व में फैल चुकी है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता के लिए 1988 के बाद से एक दिसंबर को हर साल पूरे विश्व में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।
मेडिकल की मीडिया प्रभारी डॉ वीडी पांडे ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में करीब चार हज़ार मरीज़ों का उपचार चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। पहले साल महज तीन मरीज आए थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ी है और लोग एचआईवी टेस्ट करा रहे हैं, वैसे-वैसे तादाद बढ़ती जा रही है। यहां पिछले 18 सालों में 13 हजार से ज़्यादा लोग एचआईवी का इलाज कराने आ चुके हैं।
लंबे समय तक एआरवी सेंटर के नोडल अधिकारी रहे डॉ टीवीएस आर्य ने बताया कि स्वस्थ शरीर में 800-1200 सीडी फॉर (शक्तिवर्धक कण) होते हैं, एचआईवी इन कणों को नष्ट करने लगता है, 350 सीडी फॉर होने पर कई बीमारी जकड़ लेती हैं। इलाज से मर्ज ठीक नहीं होता, यह स्टेज एड्स रहती है। कुछ साल बाद शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से भी बचाव नहीं कर पाता और बीमारियों से घिर जाता है। एचआईवी वायरस अपने अंतिम चरण में पहुंचकर एड्स बन जाता है।
वर्तमान में नोडल अधिकारी डॉ संध्या गौतम ने बताया कि मेडिकल में एचआईवी की जांच और इलाज निशुल्क किया जाता है। पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हैं।
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राहतः एड्स पीड़ितों के आंगन में गूंजी स्वस्थ बच्चों की किलकारी
अमूमन एचआईवी पीड़ित महिलाएं शादी या संतानोत्पत्ति से बचती हैं। उन्हें डर रहता है उनकी संतान भी एचआईवी से ग्रसित हो सकती है, लेकिन एड्स पीड़ित नियमित इलाज से न सिर्फ गृहस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि उनके आंगन में स्वस्थ बच्चों की किलकारियां भी गूंज रही हैं।
मेडिकल कॉलेज का एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में जिन 50 गर्भवती महिलाओं का इलाज चल रहा है, उनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा के बच्चे एचआईवी नेगेटिव निकले हैं। गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार खाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाइयां दी जाती हैं।
ऐसे होता है एचआईवी
- एक से अधिक लोगों से असुरक्षित यौन संबंध से
- संक्रमित सुई एवं सिरिंज से
- एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
- एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को
एचआईवी के लक्षण
वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
गले मुंह में लगातार छाले रहना और उल्टी व दस्त की समस्या
खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना
ये सावधानियां बरतें
शादी से पहले युवक-युवतियां एचआईवी की जांच कराएं
असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई से बचें
एचआईवी के मरीज ये करें
पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
धूम्रपान, मद्यपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें।
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शादी से पहले मेडिकल कुंडली बनवाएं
आईएमए की पूर्व सचिव और पैथोलॉजिस्ट डॉ अनिल नौसरान काफी सालों से लोगों को जागरूक करने के लिए साइकिल चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह लोगों को जागरूक कर रहे हैं की शादी से पहले जांच कराकर मेडिकल की कुंडली बनवा लें। उसके बाद ही शादी करें, ताकि एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सके।