हापुड़ के पसवाड़ा गांव में रविवार को बम बनाते समय विस्फोट में घायल सलमान ही एकमात्र चश्मदीद है। जांच एजेंसियां उस नेटवर्क को खंगालने की कोशिश कर रही हैं, जहां से सलमान ने बीस साल की उम्र में विस्फोटक पदार्थ बनाने का ककहरा सीखा।
पसवाड़ा निवासी अजीज खान की 15 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अजीज का सबसे बड़ा और छोटा बेटा सरफराज व आमिर गांव में रहते हैं। दो बेटे जावेद और जाहिद दिल्ली में काम करते हैं। चौथे नंबर का बेटा सलमान इस विस्फोट में घायल हुआ था। एक बहन कौशर की शादी हो चुकी है, दूसरी हिना अविवाहित है। मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती सलमान (20) ने जांच एजेंसियों के अफसरों को पूछताछ में बताया कि वह बचपन में कुछ ही दिन स्कूल गया था। लेकिन उसके बाद पढ़ाई नहीं की। सलमान ने कभी टेंपो चलाने तो कभी मजदूरी और कभी गन्ना छीलने की बात कही।
पुलिस की जांच के अनुसार सलमान की मेरठ के लिसाड़ी गेट में रिश्तेदारी है। इसके अलावा वह दिल्ली में भी अपनी रिश्तेदारी और भाईयों के पास जाता रहा है। घर से एक-एक माह से ज्यादा वह दूसरी जगह भी रहा है। ऐसे में सलमान अपनी राह भटककर ऐसे कुछ लोगों के संपर्क में पहुंच गया, जिसके चलते छोटी सी उम्र में एक हाथ गंवा बैठा। मेडिकल कॉलेज के ईएमओ डॉ नितिन यादव और डॉ. अजित चौधरी ने बताया कि सलमान का बायां हाथ विस्फोट में उड़ चुका है। ऐसे में ऑपरेशन कर उसके हाथ को काटने के अलावा दूसरा उपाय नहीं है। पुलिस कस्टडी में उसका इलाज रहा है। एक बहन और मौसी के अलावा परिवार के लोगों ने विस्फोटक पदार्थ बनाते समय घायल हुए सलमान से दूरी बना ली है।
पुलिस ही सब कुछ
घायल सलमान अपने दोस्तों और भाईयों के इंतजार में टकटकी लगाए रहा। कई बार उसने कहा कि उसके परिवार में कोई नहीं है। फिर सिपाहियों की तरफ इशारा कर कहा कि यही मेरे माई बाप हैं। मैं यहां से नहीं जाऊंगा।