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Meerut News: 26 साल बाद रमजान में पांच जुमे का संयोग...अलविदा जुमा आज

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ईद की तैयारी को लेकर गुरुवार देर रात घंटाघर पर जूते चप्पल खरीदी महिलाएं। संवाद
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इस बार माहे रमजान में नायाब और रूहानी संयोग बना है, जिसने हर दिल को सजदों और दुआओं की तरफ और ज्यादा मुतवज्जो कर दिया है। दरअसल, 26 बरस बाद इस मुकद्दस महीने में पांच जुमे आए हैं। आमतौर पर रमजान में चार जुमे होते हैं मगर इस दफा चांद की तारीखों और कैलेंडर के तालमेल ने इस नेमत को फिर से नसीब किया है। मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक, यह अल्लाह की खास नेमत है, जो बंदों को तौबा, इस्तिगफार और अपनी इबादतों को मुकम्मल करने का बेहतरीन मौका अता करती है।
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आज रमजान का पांचवां और आखिरी जुमा, यानी अलविदा जुमा, अकीदत और एहतराम के साथ अदा किया जाएगा। शहर काजी जैनुस सालिकीन सिद्दीकी के मुताबिक, पांच जुमों का मिलना कोई मामूली बात नहीं, बल्कि यह अल्लाह की खास रहमत और बरकत की निशानी है। उन्होंने कहा कि यह वक्त तौबा करने, अपने गुनाहों की माफी मांगने और इबादतों को मुकम्मल करने का बेहतरीन मौका होता है। नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी ने बताया कि इस्लाम में जुमे के दिन को “सय्यदुल अय्याम” यानी दिनों का सरदार कहा गया है। रमजान में इसकी फजीलत और भी बढ़ जाती है। जब एक ही महीने में पांच जुमे नसीब हों तो इसे खास रहमत समझा जाता है।
मस्जिदों में किए खास इंतजाम
अलविदा जुमा इस बात का पैगाम देता है कि रमजान अब रुखसत होने को है। इस मौके पर नमाज के बाद मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआएं की जाएंगी। साथ ही जकात और फितरा अदा करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि ईद की खुशियों में हर तबका शरीक हो सके। उधर, शहर की मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ को देखते हुए खास इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
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बाजारों में भी ईद की रौनक
बाजारों में भी ईद की रौनक अपने शबाब पर है। टोपियों, इत्र, सेवइयों और नए लिबास की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है, और हर तरफ ईद की आमद का खुशनुमा एहसास नजर आ रहा है।
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