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एडिस मच्छर को रोकने में सरकारी सिस्टम फेल

Sat, 10 Sep 2016 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 एडिस मच्छर जिले में तेजी से लोगों को वायरल बुखार में जकड़ रहा है। जिससे डेंगू और चिकनगुनिया फैल रहा है। लेकिन मलेरिया विभाग एक मच्छर तक नहीं मार पा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले इस विभाग का काम ही ऐसे मच्छरों की रोकथाम और बचाव करना है। दूसरा विभाग नगर निगम का नगर स्वास्थ्य विभाग है, जिसका काम शहर में सफाई व्यवस्था और फॉगिंग का है। इतने बड़े शहर में ये दोनों जिम्मेदार विभाग महज तीन मशीनों से फॉगिंग के दावे कर रहे हैं। लेकिन धरातल पर कहीं रोजाना फॉगिंग होती नहीं दिखती।
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मलेरिया विभाग खुद बीमार
जिले में स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम किस मजबूती से काम कर रहा है, इसकी कलई मलेरिया विभाग की कंडीशन से ही खुल जाती है। मलेरिया विभाग के पास 14 कर्मचारी हैं, जिनमें से तीन कर्मचारी सीएमओ कार्यालय से अटैच हैं। वायरल बुखार लोगों की जान ले रहा है। लेकिन ये कर्मचारी काफी अर्से से अफसरों के घर तैनात हैं। हैरानी की बात यह है कि मलेरिया विभाग के पास 40 साल पहले शहर की जनसंख्या के हिसाब से ही स्टाफ है। उसमें से भी काफी कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुल जमा 11 कर्मचारियों से पूरे जिले में डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव हो रहा है।

मैनपावर भी क्या कर लेगी
बीते दिनों सीएमओ के सामने वार्ता में स्टाफ और संसाधनों के अभाव पर सवाल उठा था। जिस पर शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने प्रस्ताव रखा था कि अगर आपके सामने मैनपावर की दिक्कत है तो हम लोग समाजसेवी संस्थाओं की मदद ले सकते हैं। लेकिन बात यह आकर अटक गई कि जब नगर निगम और मलेरिया विभाग के पास पर्याप्त संसाधन और फॉगिंग मशीनें ही नहीं हैं तो मैनपावर क्या कर लेगी।
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संसाधनों का ऐसा अभाव
साल भर मच्छरों की रोकथाम के लिए काम करने वाले मलेरिया विभाग के पास केवल तीन फॉगिंग मशीनें हैं, जिनमें से केवल एक ही चालू हालत में है। वहीं, नगर निगम के पास पांच मशीनें हैं, जिनमें से दो मशीनें ही चालू हालत में बताई जाती हैं। क्या तीन मशीनों से ही पूरा शहर कवर हो जाएगा, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। ऐसे में जहां बुखार से मौत होने का हल्ला मचता है तो स्वास्थ्य विभाग वहां कैंप लगाकर अपना पीछा छुड़ा रहा है।

शहर में गंदगी खोल रही पोल
नगर निगम का सफाई दस्ता शहर की सफाई व्यवस्था में नाकाम साबित हा रहा है। उस पर शहर से दिन भर में केवल एक बार आधा-अधूरा कूड़ा उठता है। ऐसे में अधिकांश इलाकों में कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। जिन पर चूने और कीटनाशक दवाओं का भी छिड़काव नहीं होता। यहां बैक्टीरिया पनपता है और फैलता है। शहर में जगह-जगह गंदगी से वायरल बुखार के मामले बढ़ना लाजिमी है।

बुखार से महिला की मौत   
टीपीनगर थानाक्षेत्र के शिवपुरम में बुखार ने पैर पसार लिए हैं। सविता पत्नी लीलू एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। परिजनों ने उसे बागपत रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां से उसे गढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए। शुक्रवार को उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। तीन दिन पूर्व भी बुखार से कृष्णा नामक युवक की बुखार से मौत हो गई थी। बस्ती के लोगाें का कहना है कि शिवपुरम और नई बस्ती में बुखार से कई लोग बीमार हैं। लोगों ने स्वास्थ्य शिविर लगवाने की मांग की।
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