मेरठ। पुराने गन्ने की अस्वीकृत किस्म को नई किस्म बताकर सरकार द्वारा स्वीकृत दरों से अधिक दामों में गन्ने का बीज बेचने वालों पर बीज अधिनियम, 1966 के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे बीज माफिया के खिलाफ किसान गन्ना विभाग के टोल फ्री नम्बर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इसको लेकर सोमवार को उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने कहा कि गन्ना बुवाई के लिए ’’बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उपसमिति’’ द्वारा गन्ना किस्में अधिसूचित करने की व्यवस्था है। अन्य प्रदेशों से लाई गई गन्ने की किस्म जो उप्र में सक्षम समिति द्वारा स्वीकृत नहीं हैं। उनको बेचने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि ऐसी किस्मों के गन्ने के उत्पादन में कीट एवं बीमारियों के प्रकोप की संभावना अधिक रहती है। इससे उप्र में स्वीकृत किस्मों में भी उन बीमारियों के संक्रमण की संभावना बन जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों में गन्ना किस्म 0238 की उत्पादकता में गिरावट आने के साथ-साथ रोग भी लगे हैं। इस कारण अधिक उत्पादन वाली गन्ना किस्मों के बीज की मांग बढ़ी है। देखा गया है कि कुछ बीज गन्ना उत्पादक प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई गन्ने की ऐसी नवीन किस्में जिनका बीज वितरण अभी शुरू नहीं हुआ है। उसके नाम पर किसानों से मनमाने दाम वसूल रहें है। इस कारण प्रदेश की गन्ना किस्मों की शुद्धता प्रभावित होने की संभावना है। उन्होंने परिक्षेत्र के सभी जिला गन्ना अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह उप्र गन्ना शोध परिषद में पंजीकृत बीज गन्ना उत्पादक किसानों कर भौतिक सत्यापन करें। क्योंकि कुछ किसान सोशल मीडिया पर अन्य प्रदेशों की गन्ना किस्में जो उप्र में स्वीकृत नहीं हैं। इनके संबंध में लुभावने पोस्ट डालकर गन्ना किसानों को आकर्षित करके उच्च दरों पर गन्ना बीज बेचने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ विभाग द्वारा जानकारी एकत्र की जा रही है। ताकि साइबर एक्ट एवं बीज अधिनियम के तहत ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।