फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूली बसों में सुरक्षित नहीं हैं मासूम

Sat, 27 Feb 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूली बसों में बच्चे असुरक्षित हैं। मानकों को ताक पर रखकर बसों का संचालन हो रहा है। शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद भी कोई गारंटी नहीं है कि बच्चे घर से स्कूल या स्कूल से घर सुरक्षित पहुंच जाएं। अधिकांश विद्यालयों में बसों की हालत ऐसी है कि उनमें सवारी करना खतरे से खाली नहीं। नियमों को ताक पर रखकर इन बसों का संचालन हो रहा है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन
-बस की खिड़की पर शीशे, ग्रिल लगी हों
-आपातकालीन खिड़की और दरवाजा जरूरी।
-दरवाजों के लॉक दुरुस्त हों।
-प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन उपकरण जरूरी।
-बसों में हेल्पलाइन नंबर होना जरूरी।
-बस का नियमानुसार तकनीकी परीक्षण जरूरी।
-पीला पेंट, आगे, पीछे और साइड में जरूरी।
-स्कूल के साथ कांट्रेक्ट की प्रति होना जरूरी।
-पहली सीढ़ी की ऊंचाई एक फीट से अधिक न हो।
-लो फ्लोर बस के साथ उसमें रेलिंग जरूरी।
-बच्चों के बैग रखने का उचित स्थान।
स्कूल बस के जरूरी नियम
-40 किमी प्रति घंटा हो बस की स्पीड।
-रांग साइड में बस रोकना नियम के खिलाफ।
-बस में क्षमता से अधिक बच्चे न भरे जाएं।
-बच्चे को सुरक्षित लाने-ले जाने की सुविधा जरूरी।
ऐसा होना चाहिए स्टाफ
-कंडक्टर प्रॉपर यूनिफार्म में हों, नेम प्लेट हो।
-बस से उतारने के लिए होना चाहिए सहायक।
-बस स्टाफ की प्रॉपर डिटेल पैरेंट्स को मिले।
-बस स्टाफ का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी।
-ड्राइवर और स्टाफ का हेल्थ चेकअप हो।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें