अधूरा रह गया नेशनल टैलेंट सेलेक्शन का सपना
बीएसएम स्कूल के चेयरमैन सूर्यवीर सिंह ने बताया कि आयुष कॉलेज के टॉपर छात्रों में था। हमेशा 90 प्रतिशत से अधिक अंक आते थे। वो नेशनल टैलेंट सर्च एग्जाम की तैयारी कर रहा था। उसे पूरी उम्मीद थी कि वो इसमें सेलेक्ट होगा। अपने टीचर से भी वो यही कहता था। स्कूल स्टाफ को जब उसके साथ हुए हादसे का पता चला तो सभी घटना स्थल पर पहुंचे। स्कूल संचालकों के अनुरोध पर डीएम ने रात को ही छात्र के पोस्टमार्टम के आदेश दिए। इसके बाद रात को ही पोस्टमार्टम के बाद गांव में उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसमें स्कूल स्टाफ भी शामिल हुआ। परिजन, ग्रामीण और स्कूल स्टाफ सबकी आंखों में आंसू थे।
सदमे में परिवार
आयुष एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार से था। उसके पिता प्रवीण कुमार खेती करते हैं। मां मुनेश गृहणी हैं। उसके बाबा कलीराम और दादी शीतल और आयुष के चाचा संयुक्त रूप से एक साथ रहते हैं। आयुष के साथ हुए हादसे की खबर जैसे ही घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। उसके चाचा नीरज ने बताया कि आयुष उनके भाई प्रवीण कुमार की इकलौती संतान थी। उसकी मम्मी का बुरा हाल है। पूरा परिवार सदमे में है। चाचा नीरज और लोकेश बेहद गमजदा है।
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