ये हैं लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना।
- ठंड लगना और लगातार खांसी रहना।
- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न।
- सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान।
- दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना।
- गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना।
ऐसे होती है जांच
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के नाक और थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि के लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है। स्वाइन फ्लू एनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस ए से होने वाला इंफेक्शन है। इसके इंफेक्शन ने 2009 और 2010 में महामारी का रूप ले लिया था।
ये बरतें सावधानी
- स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं।
- आराम करना, पानी की कमी न होने देना।
- आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें।
- हाथों को साबुन से धोएं।
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