मेरठ। अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस बार इस तिथि (19 अप्रैल) पर ग्रह योगों का महासंयोग बन रहा है। इससे बाजारों में मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी और कारोबार चमकेगा।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशियों (मेष और वृषभ) में स्थित होंगे। ये बेहद दुर्लभ अक्षय योग या त्रिपुष्कर योग का निर्माण कर रहे हैं। इस दिन शुक्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में मिलन महालक्ष्मी योग भी बनाएगा। इस वर्ष मालव्य राजयोग, नीचभंग राजयोग और कलानिधि योग जैसे कई शुभ योगों का अद्भुत संयोग बन रहा है। यह आर्थिक उन्नति के लिए अत्यंत उत्तम है।
वैशाख मास की अक्षय तृतीया पर आयुष्मान योग का संयोग भी बन रहा है। यह योग आयु व आरोग्य प्रदान करने वाला माना गया है। इस योग में भगवान विष्णु व शिव का पूजन तथा पितरों के निमित्त जल से भरा हुआ कलश दान करने से आयु, आरोग्य तथा ऐश्वर्य की प्राप्त होती है।
अक्षय तृतीया पर शुक्र ग्रह करेंगे राशि परिवर्तन
- आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि आज शुक्र ग्रह मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र का यह गोचर कई राशि वालों के लिए लाभकारी रहने वाला है। इससे अत्यंत शुभ मालव्य राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में यह योग पंचमहापुरुष योगों में से एक माना गया है जो धन, वैभव, सुख सुविधा और आकर्षण में वृद्धि करने वाला होता है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर किया गया दान, जप और निवेश कई गुना फलदायी साबित होगा।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह तिथि
- धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को विष्णु भगवान का परशुराम के रूप में अवतार हुआ। आचार्य कौशल ने बताया कि अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यता के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया पर ही हुई। अक्षय तृतीया के दिन से वेद व्यास ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। लक्ष्मी जी की प्रतिमा को कच्चे दूध से स्नान करवाकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। अक्षय तृतीया पर विधिवत धार्मिक क्रिया संपादित करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आर्थिक प्रगति और उन्नति के द्वार खुलते हैं।