मेरठ। उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी की सप्लाई बढ़ने से शासन की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में शासन स्तर से उन आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया गया है, जो पुलिस रिकार्ड में आरोपी तो हैं, मगर पुलिस गिरफ्तारी करना ही भूल गई है।
अनु सचिव अनिल वाजपेयी ने पत्र भेजकर कहा है कि नकली करेंसी के मामलों के मद्देनजर ऐसी भी आशंका है कि पूर्व में पकड़े गए या फरार चल रहे आरोपियों का नेटवर्क खड़ा हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि फरार चल रहे आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। मेरठ जिले के चार नाम इस सूची में भेजे गए हैं। इनमें तीन छोटा, मौसीन और सल्लू फलावदा क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि चौथा आरोपी महताब सरूरपुर क्षेत्र का रहने वाला है। छोटा, मौसीन और सल्लू के खिलाफ फलावदा थाने पर ही 2011 में केस दर्ज हुआ था, जबकि महताब के खिलाफ शामली के कोतवाली कैराना में 2012 में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। चारों आरोपी आज तक पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए गंभीरता से प्रयास ही नहीं किया। सिर्फ रिपोर्ट में आरोपी बनाकर पुलिस इन्हें भूल गई।
ब्रह्मपुरी पुलिस ने पकड़ी थी सबसे बड़ी खेप
एक महीना पहले ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने 25 लाख रुपये के नकली नोटों की खेप पकड़ी थी। इससे पूर्व में टीपीनगर और मेडिकल थाना पुलिस भी नकली नोटों के साथ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, जानी क्षेत्र में नकली नोटों से पशुओं की खरीद फरोख्त करने के बाद सिवालखास निवासी शादाब का नाम सामने आया था। उसने ही नकली नोटों की खेप लाकर पशु खरीदने वालों को मुहैया कराई थी। शादाब की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई बार दबिश दीं, मगर वह भी हाथ नहीं आया।