मेरठ। स्वस्थ रहने के लिए रोजाना योग करना जरूरी है। लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में हुए शोध से पता चला है कि योग मेटाबोलिक सिंड्रोम को नियंत्रित करने में कारगर है। शोध टीम के प्रो. टीवीएस आर्या, प्रो. आभा गुप्ता और डॉ. अमित कुमार के अनुसार योग से हाईपरटेंशन, डायबिटीज, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।
क्या है मेटाबोलिक सिंड्रोम
मेटाबोलिक सिंड्रोम कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण होता है। शरीर में कॉलेस्ट्राल, रक्तचाप, मोटापा और इंसुलिन से लड़ने वाली प्रतिरोधी तत्वों का विकास न होने के कारण शुगर स्तर अनियंत्रित हो जाता है। जिन लोगों में मेटाबोलिज्म सिंड्रोम होता है उनके निकट भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग, हृदयाघात होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
कैसे हो सकता है नियंत्रित
जीवनशैली में बदलाव लाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वजन कम होने, ज्यादा से ज्यादा शारीरिक श्रम करने, खानपान पर नियंत्रण और धूम्रपान छोड़ने से मेटाबोलिज्म को असंतुलित होने से बचाया जा सकता है।
कैसे हुआ शोध
शोधकर्ता प्रो. आभा गुप्ता का कहना है कि 30 से 65 साल के 102 मेटाबोलिज्म के मरीजों को दो भागों में बांटा गया। 51 मरीजों को योगा थेरेपी के साथ-साथ दवाइयां भी दी गई, जबकि 51 मरीजों को सिर्फ दवा ही दी गई। यह प्रक्रिया छह माह तक अपनाई गई। शोध के दौरान सभी मरीजों का ब्लड शुगर, कॉलेस्ट्राल, रक्तचाप और कमर की चौड़ाई की जांच समय-समय पर की गई। मरीजों को प्रतिदिन 30 मिनट तक कपाल भाति-प्राणायाम, भस्त्रिका-प्राणायाम, अनुलोम-विलोम-प्राणायाम, मंडूकासन और वज्रासन कराया गया।
छह माह बाद जब दोनों तरह के मरीजों के परिणाम सामने आए तो उनमें काफी अंतर पाया गया। जो मरीज योग व दवा ले रहे थे, उनकी कमर की चौड़ाई में 6.95 फीसदी की कमी पाई गई, जबकि सिर्फ दवा लेने वालों की मात्र 0.68 फीसदी ही कम हो सकी।
योग करने वालों का शुगर स्तर 32.46 फीसदी तक कम हो सका, जबकि योग न करने वालों का मात्र 23.89 फीसदी ही रहा। कॉलेस्ट्राल स्तर योग करने वालों का 28.29 फीसदी कम हुआ और न करने वालों का 20. 48 फीसदी ही। अधिकतम और न्यूनतम रक्तचाप में भी दो गुना से ज्यादा का अंतर पाया गया।