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निजीकरण के खिलाफ बिजलीकर्मियों का प्रदर्शन

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निजीकरण के खिलाफ बिजलीकर्मियों का प्रदर्शन
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मेरठ। प्रदेश के पांच शहरों की बिजली के निजीकरण का मामला गरमाने लगा है। बृहस्पतिवार को बिजली कर्मियों ने मध्याह्न तीन बजे से शाम पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर ऊर्जा भवन पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों व अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे तुगलकी फरमान करार दिया। कहा कि वे किसी भी सूरत में विद्युत ढांचे का निजीकरण नहीं होने देंगे। 27 मार्च को हड़ताल की जाएगी।
प्रदेश कैबिनेट ने मेरठ सहित गोरखपुर, बनारस, लखनऊ और मुरादाबाद शहर की बिजली के निजीकरण पर मुहर लगाई है। इस फैसले के विरोध में प्रदेश भर के बिजली कर्मी आंदोलन करने लगे हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बृहस्पतिवार से लेकर सोमवार तक रोजाना दो घंटे कार्य बहिष्कार कर मुख्यालय पर धरना दिया जा रहा है। इस कड़ी में बृहस्पतिवार को शहर के सभी बिजली कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर ऊर्जा भवन पर प्रदर्शन किया।
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अधीक्षण अभियंता आईपी सिंह और एके सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों में बिजली ढांचे में काफी सुधार हुआ है। इसके बदौलत ही लोगों को 18 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। जिन शहरों की बिजली का निजीकरण करने का निर्णय हुआ है, वहां का ढांचा दुरुस्त है और थ्रू रेट भी सही आ रहा है। जबकि इससे पहले निजीकरण की गोद में गए आगरा का बुरा हाल है। पिछले आठ वर्षों में यहां से सरकार को 4 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। सिंह ने कहा कि जिन शहरों में भी निजी कंपनियां काम कर रही हैं, वहां सरकार सीएजी ऑडिट कराए तो पता लगेगा कि वास्तविक तस्वीर क्या हैं। कर्मचारियों ने कहा कि वे पसीने से सींचे विभाग का निजीकरण नहीं होने देंगे। इस मौके पर पीसी पंत, संजय शर्मा, अमित कुमार, नरेश शर्मा, आरपी गुप्ता, अरविंद कुमार, राजेश चौधरी, विशाल मित्तल, दीपचंद, महावीर सिंह, नीरज आर्य आदि मौजूद रहे।

खास बातें:
27 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे प्रदेश भर के कर्मचारी
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