मेरठ। नगर निगम 90 वार्डों में परिवर्तित हो गया। वार्डों के जनप्रतिनिधि यानी पार्षद भी चुनकर आ गए। लेकिन निगम प्रशासन सभी वार्डों को सुविधा देना ही भूल गया। यानी न सफाई कर्मचारी दिए गए हैं और न ही टैक्स लिपिक, पथ प्रकाश आदि की समुचित व्यवस्था है। पार्षदों को भी निगम अधिकारी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। जिसके कारण जनता और पार्षद दोनों ही परेशान हैं।
पूर्व में नगर निगम 80 वार्डों का था। लेकिन इस बार निकाय चुनाव में 90 वार्ड हो गए। हालांकि पुराने वार्डों के इलाके काटकर ही नए दस वार्डों में शामिल किए गए हैं। लेकिन सरकारी व्यवस्था के अनुरूप नए दस वार्डों को सरकारी सुविधाएं जैसे सफाई, पानी, पथ प्रकाश, सड़क, नाला निर्माण आदि मिलनी हैं। इसके लिए कुछ व्यवस्थाओं में बदलाव होना चाहिए। अगर हम सफाई की बात करें तो नगर स्वास्थ्य विभाग को जहां नए वार्डों के लिए सफाई इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी तय करनी होती है, वहीं सफाई कर्मचारियों की तैनाती भी। यह निर्णय निगम प्रशासन अभी तक नहीं कर पाया है।
यही कारण है कि खासकर शहर के नए दस वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी है। गंदगी के ढेर लगे हैं। नाली और नाले ओवर फ्लो चल रहे हैं। वहीं निर्माण कार्य के लिए जूनियर इंजीनियर, अधिशासी अभियंता को प्रपोजल दिया जाता है। अभी ठीक प्रकार से इसका निर्धारण भी नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, नगर निगम प्रशासन राजस्व प्राप्ति को लेकर भी गंभीर नहीं है। जिससे पूरी व्यवस्था चरमरायी हुई है।
इसे देखा जाएगा
व्यवस्था में बदलाव हो चुका है। सफाई व्यवस्था में सफाई कर्मियों की तैनाती में नगर स्वास्थ्य अधिकारी की लापरवाही उजागर हो रही है। उसको देखा जाएगा। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
खास बातें:
- 90 वार्डों की न सफाई की व्यवस्था सुधरी और न टैक्स व्यवस्था
- निर्माण विभाग ने बनायी सूची, लेकिन अभी तक अमल नहीं