- कुलपति ने तलब किए सभी अधिकारी, कई घंटे तक दिखवाया रिकॉर्ड
- तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पर नपेंगे कई और कर्मचारी-अधिकारी
- प्रथम दृष्टया जांच में घूसखोरी के आरोप हुए कर्मचारियों पर साबित
- घूस लेकर रोजाना बना रहे थे 30 से 40 डिग्री और अन्य प्रमाण पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में दलाली का राजफाश होने के बाद कुलपति ने मंगलवार को सख्त रुख अपना लिया। डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के तमाम दस्तावेजों की जांच कराते हुए तत्काल प्रभाव से दो स्थायी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। वहीं दस कर्मचारियों के खिलाफ जांच बैठाते हुए तीन सदस्यीय उच्च कमेटी गठित की गई है। एक संविदा कर्मचारी की नौकरी जा सकती है। कई साल बाद हुई इस तरह की सख्त कार्रवाई से विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा है।
अमर उजाला ने 26 मार्च के संस्करण में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया था। स्टिंग ऑपरेशन से स्पष्ट हो गया कि यूनिवर्सिटी में कर्मचारी दलालों के माध्यम से छह सौ रुपये से 15 सौ रुपये तक में रोजाना मार्कशीट और डिग्री दे रहे हैं। जो छात्र घूस नहीं दे रहे थे वो महीने चक्कर काटने को मजबूर थे। मंगलवार को पूरे प्रकरण का खुलासा होने पर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सख्त कार्रवाई करते हुए डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के सारे रिकॉर्ड तलब कर लिए। प्रथम दृष्टया जांच पड़ताल में सामने आया कि रोजाना 30 से 40 डिग्री और प्रोविजनल प्रमाण पत्र घूस लेकर बनाए जा रहे थे। सोमवार को गाजियाबाद से आए बीडीएस के छात्र-छात्राओं को भी 13 प्रोविजनल प्रमाण पत्र नौ हजार रुपये घूस लेकर दिए गए थे।
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर कुलपति ने तत्काल रूप से छात्र समस्या निवारण केंद्र पर तैनात दो कर्मचारियों जॉनी शर्मा और कपिल कुमार को सस्पेंड कर दिया है। एक संविदा कर्मचारी अनंत कपिल को निवारण केंद्र से हटाते हुए उसके खिलाफ जांच बैठा दी गई है। जांच में दोष सही पाए जाने पर अनंत कपिल की आजीवन नौकरी जा सकती है।
इसके साथ ही पैसे लेकर डिग्री बनवाने में सहयोेग करने और रोजाना आने वाले फार्मों पर भी डिग्री देने की लापरवाही करने वाले 10 अफसरों-कर्मचारियों पर पर जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। इसमें चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह, सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज डायरेक्टर प्रो. जयमाला और प्रो. एसके दत्ता शामिल हैं। ये कमेटी कर्मचारियों-अफसरों के बारे में कुलपति को रिपोर्ट देगी, जिसके बाद कई अफसर-कर्मचारी और नप सकते हैं। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने डिग्री के साथ मार्कशीट का भी रिकॉर्ड तलब किया है। कुलपति ने बताया कि विवि में इस तरह का गलत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो ऐसा करने वालों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराएगा।