लीक से हटकर की खेती, बढ़ाया उत्पादन और मान
मोदीनगर। एक महिला किसान ने अपने पति के साथ मिलकर परंपरागत कृषि से इतर विकास का रास्ता अपनाया है। मसालों की खेती करके वह न केवल अपने परिवार को मजबूत कर रही है बल्कि कई महिलाओं को भी रोजगार दे रही है। इस महिला किसान को एक दर्जन से अधिक कृषि मेलों में सम्मानित किया जा चुका है।
मुरादनगर क्षेत्र के ग्यासपुर गांव निवासी गीता त्यागी व उसके पति बिरेश त्यागी तीन वर्ष पूर्व क्षेत्र के अन्य किसानों के समान अपनी करीब 12 बीघा जमीन में पारंपरिक गन्ना गेहूं व चावल जैसी फसलें उगाया करते थे। कम जमीन होने के चलते उत्पादन थोड़ा होता था। जिसमें गन्ने का भुगतान मिल के पास बकाया रहता था तो गेहूं और चावल की फसलों का मुनाफा मंडी के बिचौलियों की भेंट चढ़ जाता था। एक दिन गीता त्यागी नाबार्ड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम मेें हिस्सा लेकर मसालों की खेती के बारे में जानकारी मिली। जिसके बारे में उन्होंने अपनी पति को बताया। गीता सलाह को मानते ही बिरेश त्यागी ने अपनी जमीन पर हल्दी, मेथी, धनिया, लाल मिर्च, व सौंफ आदि मसाले बोए। गन्ना और गेहूं की तुलना में कम लागत होने के साथ ही उनको पांच गुणा अधिक लाभ हुआ। गत चार वर्षों से गन्ना आदि की फसलों को छोड़कर गीता त्यागी व उनके पति मसलों की खेती कर रहे हैं। उनकी सफलता को देखते हुए गांव के अन्य किसान भी मसालों की ओर रुख कर रहे हैं।
किसानी संग उद्यमिता से जुड़ने का मिला मौका
गत वर्षों में गीता त्यागी व उनके पति ने मोदीनगर स्थित अपने घर में मसाले पीसने व पैकिंग की एक छोटी सी इकाई लगा ली है। जिसमें वह अपने खेतों के मसालों को पैक करके मोदीनगर व आसपास के बाजारों में बेचते हैं। अपनी छोटी सी इकाई में काम करने के लिए महिला स्वयं सहायता ग्रुप के तहत आसपास के मोहल्ले की दर्जन भर से अधिक घरेलू महिलाओं रोजगार देकर स्वावलंबन का सबक सिखाया है। गीता त्यागी का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व तक जो महिलाएं आर्थिक तौर पर अपने पतियों पर निर्भर थीं, वे आज खाली समय में पैसे कमाकर अपने परिवार के विकास में योगदान दे रही हैं। गत वर्ष 15 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने गीता त्यागी को प्रदेश की तरफ से उत्कृष्ट उत्पादन पुरस्कार से सम्मानित किया।