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85 साल बाद कालूवाला टोंगियो में पहुंचेगी विकास की किरण

Thu, 15 Nov 2018 12:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मुनस्यारी के नजदीक की पहाड़ियों पर मंगलवार की सुबह हुआ हिमपात - फोटो : अमर उजाला
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बेहट/शाकंभरी (सहारनपुर)। शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी और जंगल में बसे गांव कालूवाला टोगिंयो में विकास की किरण पहुंचेगी। 2005 में वन अधिकार कानून बनने के बाद गांव के लोगों ने राजस्व गांव का दर्जा पाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन इस हक को पाने में ही उन्हें 13 साल लग गए और इस साल जून माह में कालूवाला टोंगियो को राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त हुआ। इसके बाद गांव की विकास योजना बननी शुरू हुई। अब जाकर घास फूस झोपड़ियों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए ग्राम पंचायत स्तर से पक्के मकान और शौचालयों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है।
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सन 1933 में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने शिवालिक जंगल में इस गांव को बसाया था। तब वन विभाग ने इन परिवारों को एक एकड़ जमीन आवंटित की थी, जिसमें उनके आवास एवं 6-6 बीघा के कृषि पट्टे शामिल हैं। दलित बहुल इस गांव को बसाने का मुख्य उद्देश्य था, जंगल की देखभाल एवं पौधरोपण कराना। इन दलित परिवारों को अब्दुल्लापुर गांव से लाकर यहां बसाया गया था। आज 500 की आबादी वाले इस गांव में करीब 45 परिवार रहते हैं।

वन विभाग की भूमि होने की वजह से इस गांव में रहने वाले मजदूर पेशा लोग पक्का निर्माण नहीं कर सकते थे। इस गांव में स्कूल, चिकित्सा, बिजली, पानी आदि की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं है। वन अधिकार अधिनियम 2005 कानून बनने के बाद इसी साल जून माह में कालूवाला जहानपुर के ग्राम प्रधान नाथीराम के प्रयासों से इस गांव को वन ग्राम से राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त हुआ और वन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों गांव में रहने वाले परिवारों को अधिकार पत्र सौंपे। 85 साल के लंबे इंतजार एवं संघर्ष के बाद राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद अब इस गांव के लोगों को विकास की उम्मीद जगी है।
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आय का स्रोत
शिवालिक जंगल में बसे कालूवाला टोंगियो में रहने वाले में रहने वाले इन परिवारों की आय का स्रोत वन विभाग द्वारा पौधरोपण अभियान में मजदूरी करने, पहाड़ियों पर उगने वाली भाभड़ घास काटकर बान बनाकर बेचने और जंगल से जलावनी लकड़ी बीनकर बेचने से होती है।
- हमने आज तक जलता हुआ बल्ब नहीं देखा। रात में जंगल के सन्नाटे के बीच लकड़ियों को जलाकर उनकी रोशनी में खाना बनाने में 50 साल बीत गए। -बाला देवी
- उम्र बीत गई जंगल में। हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि वह भी कभी मूलभूत सुविधाएं हमें मिलेंगी। -प्रकाशचंद, ग्राम पंचायत सदस्य
- हमारे गांव को राजस्व गांव का दर्जा मिलने के बाद अब गांव का विकास हो सकेगा। बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं सुविधाएं मुहैया हो सकेगी।-शेर सिंह, अध्यक्ष वनाधिकार कानून समिति
- अधिकार पत्र मिलने के बाद उन्हें 625 वर्ग मीटर जगह प्रति परिवार आवंटित की गई है। वह भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहे हैं। यह उनके लिए सपना पूरा होने जैसा है। -संजय सिंह, ग्रामीण
- पूरा जीवन फूस की झोपड़ी में बीत गया। कम से कम अब उनके बच्चों को तो सिर छुपाने के लिए पक्की छत मिल सकेगी। -संतोष देवी
- राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद अब उनके पूरे गांव की झोपड़ियां पक्के मकानों में तब्दील हो जाएंगी। बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा एवं चिकित्सा आदि सुविधाएं मिलने से उनके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। इससे ज्यादा खुशी उनके लिए क्या हो सकती है। पाल सिंह, ग्रामीण

सन 2005 में वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से कालूवाला टोंगियो गांव को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग तेज हो गई थी। जून 2018 में सभी के प्रयासों के बाद गांव को राजस्व गांव का दर्जा मिला और इन परिवारों को अधिकार पत्र मिले। यह गांव मेरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 41 मकान, 50 शौचालयों एवं गांव के बीच मेन रास्ते पर सीसी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव किया जा चुका है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र, बारात घर, स्कूल आदि का निर्माण कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है। गांव के विद्युतीकरण के संबंध में भी अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया गया है। उम्मीद है कि जल्दी गांव का विद्युतीकरण भी हो सकेगा। नाथीराम चौहान, ग्राम प्रधान कालूवाला जहानपुर।
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