सीवर में बह गई 260 करोड़ की अमृत योजना
मेरठ। शहर बीमारियों से मुक्त रहे। गलियों में मल न बहे। स्वच्छता में चार चांद लगें। इसके लिए केंद्र सरकार ने जेएनएनयूआरएम के तहत संचालित सीवर योजना का नाम बदलकर अमृत योजना किया। लेकिन 260 करोड़ की यह योजना आठ साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। यानी सिस्टम की लापरवाही से जनता को सुविधाएं मिलना अभी दूर की कौड़ी है।
नाम बड़े दर्शन छोटे
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद जेएनएनयूआरएम योजना का नाम बदलकर अमृत योजना कर दिया गया। नाम तो बदला। लेकिन कार्य की गति में बदलाव नहीं आ पाया। कभी सरकार से धन न मिलना तो कभी सीवर लाइन में जनता का अड़ंगा लगाया जाना, योजना के रुकावट बनता रहा है।
ये है सीवर योजना
2010 में जेएनएनयूआरएम योजना नाम से बना था सीवर लाइन का प्रस्ताव
205 करोड़ में सीवर पाइप लाइन और चार पंपिंग स्टेशन बनाए जाने थे
243.8 किलोमीटर पाइप लाइन
72 एमएलडी सीवर की है योजना
14400 सीवर कनेक्शन पर खर्च होंगे 40 करोड़
10400 सीवर चैंबर पर खर्च होंगे 15 करोड़
03 साल में 20 प्रतिशत घर भी नहीं जुड़ पाए
जगह-जगह रुका कार्य
- आठ साल में सीवर लाइन डालने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। घोसीपुर में पाइप लाइन का कार्य रुका पड़ा है। जिसके कारण सीवर लाइन को सरायकाजी तक नहीं पहुंचाया गया है। सरायकाजी में 72 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी प्लांट का निर्माण किया गया है। जिसके दो पंपिंग सेट संचालित हैं। प्रथम अनुबंध के अनुरूप सितंबर 2013 में कार्य पूर्ण होना था, उसकी समय सीमा बढ़ाकर जून 2014 कर दी गई थी। कार्य अब 2018 में भी पूरा नहीं हुआ है।
- मजीद नगर में सीवर पंपिंग स्टेशन तो है। लेकिन चालू नहीं हो सका है। कारण है कि पाइप लाइन का कार्य कई स्थानों पर अधूरा है। तेजगढ़ी और काली नदी के पंपिंग स्टेशन संचालित हैं। लेकिन व्यवस्थित नहीं हैं।
सीवर कनेक्शन ही नहीं तो कैसे चलेंगे पंप
अमृत योजना के तहत महानगर में फिलहाल 14400 सीवर कनेक्शन किए जाने का प्रस्ताव है। जिस पर सरकारी खजाने से 40 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। अगर अभी तक सीवर कनेक्शन की संख्या पर ध्यान दें तो केवल 800 घरों को सीवर से जोड़ा गया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब पाइप लाइन से सीवर कनेक्शन ही नहीं जोड़े गए हैं तो कितना सीवर पंपिंग स्टेशन पहुंच रहा होगा।
नहीं बन रहे सीवर चैंबर
घर से सीवर लाइन तक सीवर पहुंचाने के लिए प्रत्येक घर के बाहर चैंबर बनाए जाने हैं। प्रपोजल में इनकी संख्या 10400 रखी गयी। अभी तक 40 प्रतिशत चैंबर ही बन पाए है। चैंबर बनाने पर सरकारी खजाने से 15 करोड़ रुपया खर्च होना है।
कार्य प्रगति पर
जेएनएनयूआरएम योजना के तहत भले ही वर्ष 2010 में सीवर योजना जारी हो गयी हो। लेकिन धरातल पर आने में योजना को दो साल लगे। कारण रहा कि एसटीपी के लिए स्थान का चयन नहीं हो पाया था। हमने एसटीपी भी बना दिए हैं। पंपिंग स्टेशन चल रहे हैं। घोसीपुर में सीवर लाइन का काम रुका होने के कारण मजीद नगर का पंपिंग स्टेशन चालू नहीं हो पाया है। सीवर कनेक्शनों का कार्य एक संस्था को दिया गया है। -मुन्ना सिंह, परियोजना प्रबंधक, जल निगम
जनता तक नहीं पहुंच रहा लाभ
महानगर में सीवर की बड़ी समस्या है। जल निगम हो या फिर नगर निगम, किसी भी विभाग के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। सीवर योजना की जानकारी तो हमें नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि पार्षद उनसे शिकायत करते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच रहा है। -सुनीता वर्मा, महापौर
अधिकारी लगा रहे पलीता
हमने अपने कार्यकाल में जल निगम के अधिकारियों से लगातार संपर्क रखा। सीवर और गंगाजल पर काम होना उसी का परिणाम है। जल निगम के अधिकारियों की लापरवाही उजागर होती रही है। इसके लिए हमने शासन को लगातार पत्र लिखे। पिछले दिनों मेरठ आए नगर विकास मंत्री के सामने भी इस मुद्दे को उठाया था। केंद्र सरकार की योजनाओं को जल निगम के अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। -हरिकांत अहलूवालिया, पूर्व महापौर
खास बातें:
2010 में जेएनएनयूआरएम के तहत शुरू हुई थी सीवर योजना
04 साल पहले केंद्र सरकार ने नाम कर दिया था अमृत योजना
20 प्रतिशत घरों की भी नहीं सीवर लाइन से कनेक्टिविटी