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यूपी: निगम को लग रहा करोड़ों रुपये का चूना, एक लाख भवनों से वसूल रहे 50 से 100 रुपये टैक्स

Wed, 22 May 2019 04:01 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मेरठ में हाउस टैक्स विभाग का खेल भी निराला है। विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से निगम को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि महानगर के चार लाख भवनों में से एक लाख भवन ऐसे हैं जिनसे अभी तक 50 से100 रुपये ही वार्षिक हाउस टैक्स वसूला जाता है। इनमें से अधिकतर भवन स्वामियों पर निगम के हाउस टैक्स अधिकारी मेहरबान हैं, यही कारण है कि नगर निगम पिछले कई साल से खजाने की कमी का रोना रो रहा है।
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चार लाख भवनों में से दो लाख भवनों तक नहीं पहुंच रहे अधिकारी
महानगर में चार लाख से अधिक भवन हैं। जो एक मंजिल से लेकर बहुमंजिले भी हैं। प्रतिवर्ष शहर में भवनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन निगम के हाउस टैक्स विभाग में भवनों की संख्या स्थिर है। इतना ही नहीं 20 साल भवनों पर जो हाउस टैक्स लगाया गया था, वहीं राशि आज भी वसूली जा रही है।

ऐसे लगभग एक लाख भवन हैं जिनपर पुरानी दरों से यानी 50 से 100 रुपये प्रतिवर्ष हाउस टैक्स लग रहा है। वहीं एक लाख भवन ऐसे भी हैं जिनपर हाउस टैक्स लगाया ही नहीं जा रहा है। इतना ही नहीं टैक्स लगाने में भी खेल उजागर हो रहे हैं।
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हाउस टैक्स भरोसे शहर का विकास
नगर निगम के पास राजस्व वसूली का एक बड़ा साधन हाउस टैक्स है। इसी के आधार पर निगम बोर्ड फंड से होने वाले विकास कार्य किए जाते हैं। अगर हम विकास कार्यों की प्रगति की बात करें तो दो माह पहले 50 करोड़ से अधिक के कार्य बोर्ड फंड से किए जाने प्रस्तावित हुए थे, लेकिन धन की कमी के कारण ठेकेदारों ने टेंडर लेने से ही इंकार कर दिया था। अभी तक 100 से अधिक विकास कार्यों के टेंडर पेंडिंग में हैं।

हाउस टैक्स अधिकारियोें पर लगते रहे आरोप
2018-19 में नगर निगम ने 34 करोड़ रुपये हाउस टैक्स वसूली का दावा किया है। राजस्व वसूली को 28 करोड़ से बढ़ाकर 34 करोड़ करने में अधिकारी वाहवाही लूट रहे हैं। जबकि महानगर के भवनों से प्रतिवर्ष 100 करोड़ की हाउस टैक्स वसूली होनी चाहिए।

इसको लेकर नगर निगम की बोर्ड बैठक में अनेकों बार पार्षदों ने टैक्स विभाग के अधिकारियों को घेरने का काम किया। अपने अपने वार्ड में छूटे भवनों पर हाउस टैक्स लगाने की मांग की। लेकिन सच्चाई यह है कि जो भवन स्वामी अपनी जरूरत के मुताबिक अपने भवन पर हाउस टैक्स लगवाने के लिए निगम पहुंच रहे हैं केवल उन्हीं के भवनों पर टैक्स लगाया जा रहा है, वह भी भवन स्वामी को काफी परेशान करके।
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10 वर्गफीट के मकान पर न्यूनतम 210 रु. हाउस टैक्स
हाउस टैक्स विभाग की टैक्स दर पर गौर करें तो अगर किसी का मकान 10 वर्गफीट में बना है तो उस पर कम से कम 210 रुपए वार्षिक हाउस टैक्स होना चाहिए, लेकिन शहर की स्थिति कुल अलग ही है।  हाउस टैक्स इंस्पेक्टर हो या फिर लिपिक अथवा आला अधिकारी नियमों पर ध्यान न देकर अपने अनुरूप ही टैक्स लगा रहे हैं।

आवासी और कामर्शियल हाउस टैक्स में बड़ा खेल
हाउस टैक्स विभाग में कामर्शियल भवनों पर हाउस टैक्स निर्धारण करने में बड़ा खेल हो रहा हैं। कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि कामर्शियल भवन बहुमंजिला है, लेकिन हाउस टैक्स आवासीय के अनुरूप लग रहा है। शिकायतों के बाद भी टैक्स विभाग के अधिकारी निगम हित में कोई काम करने को तैयार नहीं हैं।
 
सभी से भरवाया जाएगा स्वकर फॉर्म
जिन भवनों पर 50 से 100 रुपये वार्षिक हाउस टैक्स लगा है उनकी सूची निकलवा ली गई है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, कर अधीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वह सभी भवन स्वामियों से स्वकर फार्म भरवाकर टैक्स को सही कराएं।

यह बात सही है कि अगर सभी छूटे भवनों पर टैक्स लगे और नियमानुसार निर्धारण हो तो निगम की आय 100 करोड़ नहीं तो 80 करोड़ वार्षिक पहुंच जाएगी। इस बार बोर्ड में राजस्व बढ़ाने के लिए  प्रस्ताव रखा जाएगा। - संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी। 
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