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बीस दिन में बद्दो नहीं, सिर्फ प्लानिंग पता चली

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बीस दिन में बद्दो नहीं, सिर्फ प्लानिंग पता चली
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मोस्ट वांटेड बदन सिंह बद्दो को ढूंढना पुलिस के लिये चुनौती बना है। बीस दिन बीत चुके हैं। लेकिन अभी सिर्फ मेरठ पुलिस बद्दो की फरारी की प्लानिंग ही जान पाई है। पुलिस का दावा है कि बद्दो की फरारी की योजना मुकुट महल होटल मालिक के मकान में 25 मार्च को बनी थी, जिसमें सिकंदर समेत सभी नामजद आरोपियों प्लानिंग में शामिल थे। जिसके आधार पर पुलिस ने इस मुकदमे की नींव रखी है।
बद्दो की फरारी में नामजद आरोपी लल्लू मक्कड़, सोनू सहगल व डिपिन सूरी का मंगलवार शाम चार बजे चार दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड पूरा हो गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। केस डायरी में पुलिस ने बद्दो की फरारी की प्लानिंग का जिक्र करते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिलना बताए हैं।
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मकान में बननी बताई प्लानिंग
अधिवक्ता संजीव गुर्जर के मुताबिक पुलिस ने बद्दो की फरारी में शामिल बद्दो का बेटा सिकंदर, एहतेशाम इलाही, शिशुपाल, जवाहरलाल, सोनू सहगल, डिपिन सूरी, लल्लू मक्कड़, अनिल छाबड़ा, अरुण, भानू प्रताप सिंह समेत सभी नामजद आरोपियों की 25 मार्च को मुकुट महल होटल के मालिक मुकेश गुप्ता के मकान के मीटिंग हुई थी। जहां पर बद्दो की फरारी की पटकथा तैयार हुई। कौन गाड़ी लेकर खड़ा होगा और कौन बद्दो को लेकर जाएगा, यह पहले से ही तय था। उस आधार पर एहतेशाम, शिशुपाल, जवाहरलाल को फर्रुखाबाद भेजा गया था। हालांकि अधिवक्ता का कहना है कि पुलिस के पास कोई सुबूत नहीं है।
पुलिस ने नींव कमजोर रखी है
सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि पुलिस के पास ऐसा कोई सुबूत नहीं है, जिससे कोर्ट में साबित हो जाए कि बद्दो मेरठ से भागा था। बद्दो की फरारी की कोई सीसीटीवी फुटेज या चश्मदीद गवाह नहीं बनाया गया, जिससे साबित हो जाए कि बद्दो की फरारी में नामजद आरोपी शामिल थे। नामजद आरोपी के बयान की कोई वैल्यू नहीं मानी जाती। विवेचक जितेंद्र कुमार सक्सेना ने सिर्फ आरोपियों के बयानों के आधार पर केस की नींव खड़ी की है, जोकि कमजोर है। बार-बार धारा बढ़ाने से पुलिस की कार्यशैली कोर्ट में उजागर की जाएगी। बद्दो की फरारी के मामले में पुलिस की थ्योरी कठघरे में खड़ी है।
थाने में बैठकर सुबूत तैयार किए
पुलिस रिमांड लेते समय कोर्ट का आदेश था कि आरोपियों से जो भी सुबूत बरामद हो, उसकी वीडियोग्राफी जरूर की जाएगी। पुलिस ने आरोपियों से फर्जी प्लेट नंबर और आरसी एक प्लांट से बरामद करनी बताई है। जिस पर आरोपी डिपिन सूरी के अधिवक्ता संजीव गुर्जर, सोनू सहगल के अधिवक्ता अमित दीक्षित ने आपत्ति लगाई है। दोनों अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस तीनों आरोपियों को थाने से बाहर लेकर नहीं गई। रिमांड के दौरान अधिवक्ता थाने में मौजूद थे। पुलिस ने आरोपियों को थाने में रखकर ही सारे सुबूत फर्जी दाखिल किए। उनके बयान भी गलत हैं। पुलिस अधिकारियों के मोबाइल की लोकेशन निकालने का हवाला भी अधिवक्ताओं ने दिया है।
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फरारी के आरोपियों पर धारा बढ़ी
बदन सिंह बद्दो की फरारी में तीनों आरोपियों को पुलिस ने मंगलवार को स्पेशल सीजेएम रामलाल की अदालत में पेश किया। जहां से तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों पर धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं (420, 467, 468, 471) बढ़ाए जाने की अर्जी दी। जिस पर अदालत ने न्यायिक रिमांड पर धाराओं को बढ़ाकर आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा से न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने पुलिस द्वारा बढ़ाई धाराओं पर आपत्ति जताई है।
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