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आफत की बारिश, शहर में पानी ही पानी

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मेरठ। शुक्रवार को बारिश फिर आफत बनकर बरसी। शहर में हर तरफ पानी ही पानी हो गया। नाले उफनकर सड़कों पर बह निकले। सड़कों पर तीन-तीन फीट पानी खड़ा होने से नालों और सड़कों को पहचानना मुश्किल हो गया। घरों, दुकानों और बाजारों में जलभराव के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। नगर निगम के दावे फिर फेल साबित हुए। मध्याह्न में बारिश रुकने के बाद थोड़ी सी राहत मिली। लेकिन शाम के छह बजते-बजते फिर से बूंदाबांदी शुरू हो गई।
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बारिश ने खोली दावों की कलई
नगर निगम ने मानसून से पहले महानगर के सभी नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन शुक्रवार की बारिश ने इन दावों की कलई खोलकर रख दी। 36 घंटे से रुक रुककर हो रही बारिश के कारण शहर में इतना जलभराव हुआ कि ओडियन, बच्चा पार्क नाला, आबूनाला और नालों की पटरी पर बनी सड़क की पहचान करना भी मुश्किल हो गया। नालों की गंदगी सड़कों पर आ गयी। तेज बहाव के साथ पानी बहता नजर आया। लोग भयभीत दिखे। नालों की पटरी पर अवैध कब्जा करके मकान बनाने वालों की नींव तक पानी में डूब गयी। माना जा रहा है कि अगर लगातार दो-तीन दिन इसी प्रकार बारिश हो गयी तो नालों के किनारे खड़े भवन भरभराकर गिर सकते हैं। वहीं, सरकारी खजाने से बनाए गए डिवाइडरों की गुणवत्ता की भी एक ही बारिश में पोल खुल गयी। सड़क पर बहते पानी के बहाव से एनएएस कालेज और शंकर आश्रम के समाने डिवाइडर खोखले हो गए। ग्रिल उखड़ गयी। गुणवत्ता के दावे एक ही बारिश के बह गए।
स्कूली बच्चे हुए सबसे ज्यादा परेशान
बारिश ने सबसे अधिक स्कूली बच्चों को परेशान किया। स्कूल की छुट्टी के समय दोपहर को झमाझम बारिश पड़ रही थी। दिल्ली रोड, रेलवे रोड, रोहटा रोड, बच्चा पार्क, खैरनगर आदि क्षेत्रों में स्कूली बच्चे सड़कों पर पानी में खेलते नजर आए। बच्चों को लेकर अभिभावक भी परेशान रहे। बच्चे जलभराव से जूझते और पानी में भीगते हुए घर पहुंचे। कारण है कि कई सड़कों पर तीन-तीन फीट पानी भरा था। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे भी हैं। सड़कों पर खुले मेनहॉल से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
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10 प्रतिशत लोगों के कारण पूरा शहर परेशान
शहर में जलभराव के लिए नाला सफाई को जिम्मेदार माना जाता है। जिसके लिए जनता नगर निगम को कोसती है। जबकि निगम के साथ शहर के वह 10 प्रतिशत लोग भी शहर को टापू बनाने के लिए जिम्मेदार हैं जिन्होंने अपने प्रतिष्ठान नालों पर बनाए हुए हैं और नालों को पाटकर अवैध कब्जे किए हुए हैं। वे लोग भी कम जिम्मेदार नहीं, जिन्होंने अपने घरों के आगे सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। ये लोग ही नाला सफाई का विरोध करते हैं। मेट्रो प्लाजा से बाईपास चौराहा तक अधिकांश लोगों ने अपनी दुकान या घर के बाहर से निकल रहे नालों पर कब्जे किए हुए हैं। कई साल से नाला सफाई ही नहीं होने दी है। यही हाल शास्त्रीनगर, जागृति विहार, कंकरखेड़ा, प्रभातनगर,, जाकिर कालोनी, माधवपुरम, ब्रह्मपुरी, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स आदि क्षेत्रों का भी है।
घरों में कैद हुए लोग
बारिश के पानी के साथ नालों का गंदा पानी दुकानों, मोहल्लों और कॉलोनियों में भर गया। जिसके कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। शहर के कई इलाकों में दोपहिया और चौपहिया वाहन पानी में बंद हो गए। लोग वाहनों को धकेलकर मैकेनिकों के पास ले जाते नजर आए।
अजंता कालोनी में गिर गया पेड़
हवा के साथ तेज बारिश से शहर में कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए। मवाना बस स्टैंड के पास मानसरोवर मोड़ पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। अजंता कालोनी के मुख्य मार्ग पर भी यूकेलिप्टिस का पेड़ उखड़ने से मार्ग बाधित हो गया। स्थानीय लोगों ने पेड़ को कटवाना शुरू कर दिया।
शहर के ये हिस्से हुए जलमग्न
जागृति विहार, शास्त्रीनगर, कैलाशपुरी, फूलबाग कॉलोनी, शंकर आश्रम रोड, एनएएस कालेज, बच्चा पार्क खैरनगर, गोलाकुआं, दिल्ली रोड, बागपत रोड, जाकिर कालोनी, खत्ता रोड, माधवपुरम, कमिश्नरी चौराहा, कलक्ट्रेट, साकेत, पांडवनगर, प्रभात नगर, यादगारपुर, रोहटा रोड, मेन रोड ब्रह्मपुरी, इंद्रानगर ब्रह्मपुरी द्वितीय, गंगानगर, छतरीवाला पीर, घंटाघर आदि।
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