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पीर खुशहाल दूसरे दिन भी हुई कार्रवाई

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गांव बिहारगढ़ स्थित पीरखुशहाल खानकाहे पर चलता प्रशासन का बुलडोजर। - फोटो : KHATAULI
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पीर खुशहाल चिल्लाहगाह में 27 कमरे किए जमींदोज
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। बिहारगढ़ में वन विभाग की जमीन पर बनाए गए पीर खुशहाल के चिल्लागाह पर प्रशासन ने बृहस्पतिवार को भी पांच घंटे कार्रवाई की। इस दौरान उनके महल जैसे आवास के 27 कमरों को प्रशासन की जेसीबी चलाकर ध्वस्त कर दिया। वन विभाग ने चिल्लाहगाह की अधिकांश जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है।
पीर खुशहाल ने वन विभाग से वर्ष 1975 में 98 बीघा जमीन 30 साल के लिए लीज पर लेकर बिहारगढ़ के जंगल में महलनुमा आवास बनवाया। लीज की सीमा समाप्त होने पर भी पीर खुशहाल ने जमीन खाली नहीं की। सरकारी मशीनरी और राजनेताओं पर पीर खुशहाल का इतना प्रभाव था कि 15 साल तक वन विभाग जमीन को खाली किराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के पत्र के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को जमीन को खाली करने की कार्रवाई शुरू की। पहले दिन दस कमरे गिराए गए थे। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को प्रशासन ने पांच घंटे तक यहां खड़ी महल जैसी बिल्डिंग को गिराने का काम शुरू किया। कार्रवाई के दौरान अब तक 27 कमरे जमींदोज कर दिए गए। कार्रवाई के दौरान डीएफओ सूरज कुमार, तहसीलदार जसविंद्र, नायब तहसीलदार अभय पांडे, सीओ जानसठ सोमेंद्र नेगी, सीओ जानसठ शकील अहमद , वन रेजंर सिंह राज सिंह पुंडीर, कुलदीप चौधरीा, दीपक कुमार, मोहन बहुखंडी सहित कई थानों का पुलिस बल मौजूद रहा। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि पूरी जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा, इसके लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी
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योगी सरकार ने जबरन दरगाह तुड़वाया : जव्वाद अहमद
मुजफ्फरनगर। बिहारगढ़ में 45 साल तक अपनी सल्तनत खड़ी करने वाले पीर खुशहाल के दरबार में बड़ी-बड़ी हस्तियां नतमस्तक होती रही हैं। देशभर में उनकी मुरीदों की संख्या काफी है। यही वजह रही कि लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी वन विभाग जमीन पर कब्जा नहीं ले पाया।
मोरना ब्लॉक के बिहारगढ़ में खुशहाल पुत्र बहादुरखान वर्ष 1964 में आए थे। धीरे-धीरे खुशहाल ने अपना वर्चस्व बढ़ाना शुरू कर दिया, जिसमें आसपास के लोगों के अलावा उसने राजनीतिक लोगों को अपना अनुयायी बनाया। वर्ष 1979 में अपना मूल निवास प्रमाणपत्र बनवा लिया। राजनेताओं के साथ-साथ अधिकारी भी उनकी चौखट पर आने लगे।
आलीशान महल से कम नहीं थी चिल्लाहगाह
खुशहाल ने वर्ष 1975 में बिहारगढ में 6.6 हेक्टेयर भूमि को धार्मिक व कृषि कार्य के लिए 30 वर्ष की लीज पर लिया। लीज पर लेने के बाद इस भूमि में आलीशान महल, मस्जिद, चिल्लागाह, कब्रिस्तान व ईदगाह बनाई गई। मेहमानखाना हर समय उसके अनुयायियों से भरा रहने लगा। विदेशी मेहमानों का भी आनाजाना लगा रहता था। उसके महल में एक महीने में कई गाड़ी डीजल व बड़ी संख्या में सिलिंडर खर्च होते थे।
चिल्लाहगाह में लगे थे जैमर
महल में जैमर लगे थे, ताकि वहां पर कोई मोबाइल का इस्तेमाल न कर सके। चिल्लाहगाह में रहने वाले लोगों की वॉकी-टॉकी से बात होती थी।
2017 में हुआ था खुशहाल निधन
मुजफ्फरनगर। पीर खुशहाल का बीमारी के चलते 17 अप्रैल 2017 को निधन हो गया था। उनकी मौत के बाद उनकी गद्दी के लिए परिवार में रस्साकशी शुरू हुई थी। यह रस्साकशी छह माह तक चली थी और अंत में उनके दामाद जव्वाद मियां खुशहाली को उनका प्रतिनिधि बनाते हुए गद्दीनशीं किया गया।
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बालियान के पास हर पांच मिनट में फोन आया
मुजफ्फरनगर। पीर खुशहाल के चिल्लाहगाह प्रबंधकों के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब यह पता लगा कि जमीन खाली कराने में केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान दबाव बना रहे हैं, तो हर पांच मिनट बाद बालियान के पास उनके अनुयायियों का फोन आता रहा। संजीव बालियान ने बताया कि मैने सभी से एक बात कही कि कार्रवाई वन विभाग कर रहा है। जमीन का समय पूरा हो चुका है। हाईकोर्ट जमीन खाली कराने के लिए कह चुका है। ऐसे में अवैध कब्जा नहीं रह सकता। बालियान ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। ऐसा नहीं हो सकता कि ताकतवर आदमी पर कार्रवाई न हो और गरीब पर सीधे कार्रवाई की जाए। योगी सरकार में सभी पर बराबर कार्रवाई हो रही है।
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