मेरठ। कांवड़ यात्रा के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का प्लान तैयार कर लिया है। मेरठ रेंज के मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत और बुलंदशहर के लिए आईजी रेंज ने 26 कंपनी फोर्स मांगी है। इसमें 22 कंपनी पीएसी व अर्धसैनिक बल और चार कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स की डिमांड है।
आईजी आलोक सिंह ने बताया कि कांवड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक नहीं होने दी जाएगी। मेरठ में औघड़नाथ मंदिर, बागपत में पुरा महादेव मंदिर और रेंज के अन्य जिलों के प्रमुख मंदिरों में जैसे ही कांवड़ियों का आना शुरू होगा, मंदिरों की सुरक्षा में एनएसजी के जवान व एटीएस लगाई जाएगी। एनएच-58 और कांवड़ मार्ग पर भी भारी संख्या फोर्स लगाई जाएगी। आईजी ने सभी जिलों के कप्तानों को यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। 18 जुलाई से हाईवे पर रूट डायवर्जन का प्लान है। भारी वाहनों को डायवर्ट कर बस अड्डों को शहर से बाहर शिफ्ट कर दिया जाएगा। सभी संवेदनशील स्थान, प्रेशर प्वाइंट और सीसीटीवी कैमरों को लेकर भी तैयारी कर ली गई है।
चार धाम यात्रा के लिए जाम फ्री रूट
चारधाम के श्रद्धालुओं को कांवड़ियों से कोई परेशानी न हो। इसे देखते हुए यूपी और उत्तराखंड के पुलिस अधिकारियों ने चार धाम यात्रा के लिए जाम फ्री रूट तैयार किया है। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के श्रद्धालु गंगोत्री-यमुनोत्री जाने के लिए एनएच-58 से मुजफ्फरनगर, देवबंद, गागलहेड़ी, देहरादून, विकासनगर, यमुना ब्रिज, डामटा होते हुए निकलेंगे। इन चारों राज्यों के श्रद्धालुओं को केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जाने के लिए मेरठ से मीरापुर, बिजनौर, कोटद्वार, पौड़ी, श्रीनगर होते हुए निकलना होगा। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल से गंगोत्री-यमुनोत्री और केदारनाथ-बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अलग रूट बनाया गया है। चारधाम यात्रा का रूट प्लान एनएच-58 से हटाकर बनाया गया है। मेरठ से मुजफ्फरनगर के बीच चार धाम श्रद्धालुओं को करीब 58 किलोमीटर का सफर कांवड़ मार्ग पर करना होगा। इसके बाद वे पूरी तरह कांवड़ियों के रास्ते से कट जाएंगे। मेरठ रेंज आईजी आलोक सिंह ने बताया कि चारधाम यात्रा का रूट कांवड़ यात्रा रूट से अलग बनाया गया है। जिससे श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को कोई परेशानी न हो। प्रस्तावित रूट प्लान को राज्यों ने आपस में साझा किया है।
गंग नहर में नहीं डूबेंगे श्रद्घालु
पुलिस प्रशासन के अफसरों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा में कांवड़ को लेकर हुई अंतरराज्यीय मीटिंग में गंगनहर को लेकर भी चर्चा हुई। पूर्व में कांवड़ पटरी मार्ग पर लगातार हादसे होते रहे हैं। ऐसे में कांवड़िया या अन्य श्रद्घालुओं के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। इसके लिए उत्तराखंड प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है कि कांवड़ के समय गंगनहर में पानी कम छोड़ा जाए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ भी मंथन किया जा रहा है। यूपी और उत्तरांखड के अधिकारी इस पर मंथन में लगे हुए हैं।